बाल्कन पैक्ट
बाल्कन पैक्ट दरअसल बाल्कन प्रायद्वीप में स्थित यूनान, तुर्की, रोमानिया और यूगोस्लाविया जैसे देशों के मध्य 9 फरवरी 1934 को एथेंस में हुआ एक ऐतिहासिक समझौता था, जिसे तुरंत प्रभाव से लागू माना गया। इस समझौते का मकसद प्रथम विश्व युद्ध के बाद इस इलाके में भू-राजनीतिक यथास्थिति को कायम रखना था। इस समझौते के जरिए चारों देश एक-दूसरे के अलावा अपने पड़ोसी देशों के साथ भी क्षेत्र संबंधी तमाम विवादों को लंबित रखने पर सहमत हो गए। इटली, अल्बानिया, बुल्गारिया, हंगरी व सोवियत संघ जैसे देशों को भी इस समझौते के साथ जुड़ने के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।
जाहिर तौर पर ये ऐसे देश थे, जिनके भीतर भौगोलिक विस्तार की संभावनाएं आकार ले रही थीं। इस समझौते को १ अक्टूबर १९३४ को लीग ऑफ नेशंस संधि श्रंखला के तहत रजिस्टर्ड कराया गया। यह समझौता ओटोमन साम्राज्य का हिस्सा रहे दक्षिण-पूर्वी यूरोप में स्थित स्वतंत्र देशों खासकर यूनान व तुर्की के मध्य शांति कायम करने में तो सफल रहा, लेकिन क्षेत्रीय षड्यंत्र पनपने से नहीं रोक सका, जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहां जर्मनी, ब्रिटेन व सोवियत संघ जैसे देशों को सैन्य हस्तक्षेप करने के लिए प्रेरित किया।