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जब देवता ने ब्रह्मजी से मांगा मनुष्य बनने का वरदान

 
Source: bhaskar news   |   Last Updated 00:10(26/01/12)
 
 
 
 
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जीवन दर्शन.. एक बार एक देवता परब्रह्मजी प्रसन्न हो गए। उस देवता को महर्षि दुर्वासा ने श्राप दिया था कि तू अब देवता नहीं रहेगा। देवता ने ब्रह्म से कुछ और बना देने की प्रार्थना की। ब्रह्मजी बोले - तुम जो कहोगे, वही बना दूंगा। तब देवता ने कहा - एक बार मुझे सब लोक देख आने दीजिए। ब्रह्मजी ने स्वीकार कर लिया। देवलोक तो देवता का देखा हुआ था।


इसलिए वह छोड़कर उसने जनलोक, तपलोक, महलरेक और सत्यलोक देखे। उसने सोचा कि इन लोकों में ऋषि बनकर तपस्या करनी होगी। फिर वह पाताल लोक गया। वहां दैत्य और बड़े-बड़े नागों को देखकर देवता डर गया। वह पृथ्वी पर आया। उसने सोचा कि पक्षी बनूं तो चाहे जहां उडूंगा, किंतु फिर अगले ही पल उसने हवाई जहाज उड़ाता मानव देखा।


वह डरा कि पक्षी बनने पर मनुष्य उसे मार सकता है। उसने जल में रहना चाहा, तो वहां भी मनुष्य जहाज और पनडुब्बियां चला रहा था। देवता ने पाया कि हाथी, सिंह जैसे शक्तिशाली जानवरों को भी मनुष्य पिंजरे में बंद कर अपना दास बना लेता है। पानी और हवा में भी चलता है और एक स्थान पर बैठकर हजार कोस दूर की बात सुन लेता है।

उसने आकर ब्रह्मजी से वैकुंठ, साकेत व शिवलोक के विषय में पूछा तो ब्रह्मजी ने बताया कि मनुष्य अपनी साधना और भक्ति से इन परम दिव्य लोकों में जा सकता है। तब देवता ने ब्रrाजी से स्वयं को मनुष्य बना देने की प्रार्थना की, जिसे उन्होंने मान लिया। वस्तुत: मनुष्य को ईश्वर द्वारा दी गईं शारीरिक व मानसिक क्षमताओं को विकसित कर तद्नुसार कार्यशील होने की जरूरत है।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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