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जब देव आते हैं धरती पर स्नान करने

 
Source: राजेश साहनी   |   Last Updated 00:37(05/02/12)
 
 
 
 
पर्व-प्रसंग- कहते हैं श्री हरि व्रत, दान एवं तप से भी उतने प्रसन्न नहीं होते, जितने माघ पूर्णिमा को स्नान करते हुए नाम स्मरण होने से। ‘पद्मपुराण’ के अनुसार, पाप-तापों से मुक्ति, उत्तम लोकों की प्राप्ति एवं विष्णुकृपा प्राप्त करने के लिए माघ स्नान जरूरी है। ‘मत्स्य पुराण’ में लिखा है कि माघ पूर्णिमा को जो व्यक्तिस्नान के बाद ‘ब्रह्मवैवर्त पुराण’ पुस्तक दान करता है, उसे यथानामे ब्रह्मलोक की ही प्राप्ति होती है।

‘महाभारत’ के ‘अनुशासन पर्व’ में माघ स्नान की महत्ता में कहा गया है कि जिन्हें चिर काल तक स्वर्ग में रहने की कामना हो, उन्हें प्रयाग आदि तीर्थ स्थानों में सूर्य के मकर राशि में रहने की अवधि के दौरान स्नान अवश्य करना चाहिए। माघ मास में तीर्थ राज प्रयाग में तीन करोड़, दस हजार, अन्य तीर्थो का समागम होता है, अत: माघ पूर्णिमा को जो इस तीर्थ में स्नान करता है, वह सर्व पापों से मुक्त होकर स्वर्ग लाभ प्राप्त करता है। रामचरित मानस में भी माघ की महिमा का वर्णन है- माघ मकरगत रवि जब होई। तीरथ पतिहिं आव सब कोई।। देव दनुज किन्नर नर श्रेनी। सादर मज्जहिं सकल त्रिवेनी।।

माघ स्नान की महिमा

माघ मास में प्रमुखत: स्नान एवं दान की महिमा अपरंपार बताई गई है। यदि महीने भर स्नान संभव न हो, तो माघ पूर्णिमा को स्नान कर उसका पूर्ण पुण्य लाभ पा सकते हंै। प्रयाग, हरिद्वार, कुरुक्षेत्र या अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व होता है। ‘नारद पुराण’ के अनुसार, माघ पूर्णिमा को गंगा स्नान कुरुक्षेत्र के समान पुण्यदाई है।

काशी की गंगा सौगुनी पुण्यदाई मानी गई है एवं प्रयाग में काशी से भी दस गुना ज्यादा पुण्य की प्राप्ति होना बताया गया है, जहां गंगा-यमुना-सरस्वती नदियों का संगम है। संगम का जल ‘वेणी’ कहा जाता है। पुराणों के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु, महेश, रुद्र, आदित्य, यक्ष, गंधर्व, किन्नर, तत्वदर्शी पुरुष, पार्वती-लक्ष्मी सहित समस्त देव पत्नियां, नाग पत्नियां तथा पितृगण, ये सब माघ मास में त्रिवेणी पर स्नान करने आते हैं।

कहां करें स्नान


‘नारद पुराण’ के अनुसार मनुष्य अपने घर में 60 वर्ष स्नान करने पर जो पुण्य लाभ प्राप्त करता है, वह फल उसे सूर्य के मकरगत रहते हुए माघी पूर्णिमा के स्नान से प्राप्त हो जाता है। सामान्य नदियांे में स्नान करने से चौगुने फल की प्राप्ति होती है। किन्ही दो नदियों के संगम में स्नान से सौ गुने फल की प्राप्ति होती है तथा प्रयाग की गंगा में स्नान करने से हजार गुने अधिक फल की प्राप्ति होती है- ऐसा माना गया है।


नर्मदा के जल में माघी पूर्णिमा का स्नान पाप नाशक, दु:खनाशक, संपूर्ण मनोकामनाओं को सिद्ध करने वाला तथा शिवलोक की प्राप्ति कराने वाला होता है। सरयू, सिंधु तथा गोदावरी आदि समुद्रगामी नदियों में इस दिन स्नान करना मोक्ष कारक माना गया है। पुष्कर तीर्थ में स्नान करने से ब्रह्मा की कृपा प्राप्त होती है, तो गोमती में स्नान करने से पुनर्जन्म नहीं होता।


महाकाल तीर्थ में माघी पूर्णिमा पर किया जाने वाला स्नान-दान रुद्रलोक की प्राप्ति एवं शिवकृपा देता है। गंगा का जल यदि सुलभ हो, तो वह पाप नाशक, विष्णु की कृपा प्राप्त कराने वाला एवं मोक्ष कारक माना गया है। तीर्थ राज प्रयाग में स्नान करते हुए पितरों का तर्पण कर, यथा संभव दान करने से संपूर्ण मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। माघ स्नान की महिमा ही है कि बारह वर्षो के अंतराल में पड़ने वाला कुंभ मेला माघ मास में ही आता है।

कैसे करें स्नान

माघ पूर्णिमा का स्नान सूर्योदय से पूर्व तक ही विशेष शुभ फलदायक है। स्नान के बाद पितरों को श्रद्धापूर्वक तर्पण देते हुए भगवान विष्णु का पूजन करें। फिर ब्राह्मण एवं ब्राह्मणी के जोड़े को भोजन कराते हुए यथा संभव कंबल, वस्त्र, जूते, रत्न एवं मुद्रा का दान करना चाहिए। माघ पूर्णिमा पर उक्त विधान द्वारा स्नान-दान से अश्वमेघ के समान फल मिलता है और मनुष्य के समस्त पाप-ताप, दु:ख-क्लेशों का निवारण होता है।

स्नान का मंत्र त्न मकरस्थे रवौ माघे गोविंदाच्युत माधव।

स्नानेनानेन में देव यथोक्त फल प्रदो भव।।

राशि अनुसार माघी पूर्णिमा पर स्नान-दान

माघी पूर्णिमा पर स्नान एवं दान का विशेष महत्व है। इस दिन किए दान से जहां जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, वहीं अनिष्ट ग्रहों से संबंधित पीड़ाओं का निवारण भी होता है।

मेष : जल में लाख तथा लाल पुष्प डालकर स्नान करें। स्नान के बाद ब्राह्मण को लाल मसूर, लाल वस्त्र में बांधकर दक्षिणा सहित दान करने से जीवन में आ रही बाधाओं की निवृत्ति होगी।

वृषभ : जल में कच्चा दूध तथा श्वेत पुष्प डालकर स्नान करें। स्नान के बाद किसी कन्या को खीर खिलाने से सौभाग्य की प्राप्ति होगी।

मिथुन : जल में गन्ने का रस मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद ब्राह्मण को किसी हरे वस्त्र में मूंग की दाल रखकर दान करें। सुख-समृद्धि में वृद्धि होगी।
कर्क : जल में पंचगव्य मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद किसी पुजारी को लाल कपड़े में आटा और गुड़ बांधकर दान करें।

सिंह : जल में केसर मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद किसी गरीब को सात तरह के अनाज का दान करने से अवरोध दूर होंगे।

कन्या : जल में शहद तथा अक्षत मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद विष्णु मंदिर में बेसन के लड्डुओं का भोग लगाएं।

तुला : जल में इलाइची मिलाकर स्नान करें। स्नान बाद गाय को खीर खिलाने से ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी।

वृश्चिक : जल में लाल चंदन मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद निर्धन तथा असहाय व्यक्तियों को भोजन, वस्त्र तथा जूते-चप्पल दान करें।

धनु : जल में हल्दी मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद चने की सवा किलो दाल तथा सात फूल पीले रंग के वस्त्र में बांधकर पुजारी को दान करें।
मकर : जल में काले तथा सफेद तिल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद तेल में सिकी हुई पूड़ियां गरीबों में बाटें।

कुंभ : जल में काले तथा सफेद तिल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद काले वस्त्र में बांधकर काला तिल तथा सरसों का तेल किसी ब्राह्मण को दान करें।

मीन : जल में तीन रंगों के पुष्प मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद किसी गरीब को एक कंबल का दान करें। -ज्योतिषविद् एवं ज्योतिष सलाहकार
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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