खेलने कूदने की उम्र में ले लिए सात फेरे, लेकिन अब तो जाना पड़ेगा जेल

भागलपुर . कम उम्र की शादी रोकें, जीवन की बर्बादी रोकें। ऐसे न जाने कितने स्लोगन, विज्ञापन आज बेमानी साबित हो रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण है जमुई का मलयपुर गांव। यहां सोमवार की रात करीब 20 जोड़ी बच्चे-बच्चियों की सामूहिक शादी एक ही मंडप में करा दी गई। वह भी धूमधाम से समारोह में। महादलित टोला बलवारे की ये जोडिय़ां 13 वर्ष से भी कम उम्र की हैं। अधिकतर की उम्र सात-आठ साल है। कई के तो दूध के दांत भी नहीं टूटे हैं। इन्हें पता भी नहीं है कि शादी होती क्या है।
विवाह की तारीख पहले से ही तय थी, पर प्रशासन और बच्चों के अधिकारों के लिए काम कर रहे संगठनों का ध्यान कानूनन अपराध घोषित इस आयोजन पर नहीं गया। यह एक घटना है, जबकि डीएलएचएस (जिला स्तरीय हाउस होल्ड सर्वे) की रिपोर्ट बताती है कि जमुई जिले में 85 फीसदी बच्चों की शादी 18 साल से कम उम्र में ही करा दी जाती है।
हालांकि बाल विवाह कराने वाले माता-पिता का अपना तर्क है। उनका कहना है कि कम उम्र में बच्चों को जिम्मेदारी दे देने से गलत कार्यों की ओर उनका ध्यान नहीं जाता है। आपसी सद्भाव के साथ ही सामाजिक रिश्ते भी मजबूत होते हैं।
नाच रहे थे बाराती रो रहे थे वर-वधू
शादी समारोह में डीजे की धुन पर बाराती नाच रहे थे और मंडप में बच्चे रो रहे थे। गुड्डे और गुडिय़ा की तरह कुछ जोडिय़ां मंडप में ही सो रही थीं। माता-पिता और रिश्तेदार बच्चों को पकड़ कर उनकी शादी के रीति-रिवाज पूरे करा रहे थे।
शादी के लिए लड़की की उम्र कम से कम 18 साल और लड़के की उम्र 21 साल निर्धारित है।
बाल विवाह कराने पर दो साल के जेल व एक लाख रुपए का जुर्माना तय किया गया है।
कानून के दायरे में घराती, बराती, पंडित, बैंक वाले, ढोल बजाने वाले और हलवाई भी आएंगे।
दर्ज होगी प्राथमिकी
मेरी जानकारी में 20 जोड़ी बच्चों की शादी कराई गई है। बाल विवाह निषेध के नोडल पदाधिकारी को परिजनों व जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है। साथ ही बाल विवाह जैसी कुरीतियों को रोकने के लिए एक जागरूकता अभियान भी चलाने का निर्देश दिया है। मयंक वरबड़े, जिलाधिकारी, जमुई








