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लॉ में इमोशन से काम नहीं चलता

Bhaskar News | Feb 23, 2013, 22:42PM IST
 
 

 
 
 
 
 पटना  .जुवेनाइल जस्टिस पर बोलते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश अल्तमश कबीर ने कहा है कि लॉ क्या है यह देखना आपका काम है। कानून में इमोशन की जगह नहीं है। बालिक और नाबालिक के बीच बहुत बड़ी दिवार है। लॉ को सामने रखकर फैसले लिए जाने चाहिए।
 
 
 
 
अल्तमश कबीर शनिवार को पूर्वी क्षेत्र के न्यायिक सम्मेलन के दूसरे दिन न्यायधीशों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज नए तरह के अपराध हो रहे हैं। साइबर क्राइम के केसों की संख्या बढ़ गई है।
 
 
 
 
लेकिन कितने मजिस्ट्रेट ऐसे केसों को समझ सकते हैं। इस मौके पर पटना उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायधीश रेखा एम दोशित के अलावे झारखंड समेत 7 राज्यों में हाईकोर्ट के न्यायधीश और 17 राज्यों के न्यायधीश मौजूद थे।
 
 
 
गवाहों की सुरक्षा जरुरी
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश ने कहा कि सजा की संख्या दर्ज केसों के मुकाबले काफी कम है। उन्होंने कहा कि इसके लिए गवाहों का कोर्ट तक न पहुंचना, बेहतर तरीके से अनुंसधान न होना, गवाहों का बदल जाना, गवाहों को धमकाया जाना, उन्हें प्र्याप्त सुरक्षा नहीं मिलना जैसे कई कारण हैं।
 
 
 
अल्तमश कबीर ने कहा कि गवाहों को प्र्याप्त सुरक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने कोर्ट के भीतर गवाहों के लिए बेहतर माहौल बनाने की बात भी कही। उन्होंने उदाहरण दिया कि कोर्ट में उनके बैठने की भी जगह नहीं है।
 
 
 
 
 
जजों की संख्या बढ़नी चाहिए
 
अल्तमश कबीर ने कहा कि न्याय सभी के लिए होना चाहिए। लेकिन इसमें काफी वक्त लगता है। इसके लिए जजों की संख्या में बढ़ोत्तरी होनी चाहिए।
 
 
 
जो न्याय पाने में सक्षम नहीं हो उन्हें कानूनी मदद मिलनी चाहिए। उन्होंने बच्चों, महिलाओं और पिछड़े लोगों को कानूनी मदद करने की बात कही।
 
 
 
हालांकि उन्होंने कहा कि केस के अनुसंधान से ही न्याय मिलने की प्रक्रिया शुरु होती है। इसलिए न्याय में पुलिस की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। इसके बाद कोर्ट का काम होता है।
 
 

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