पटना। भारत में बुद्ध और उनके विचारों को जीवित रखना बड़ी चुनौती बन चुकी है। देश की मात्र एक प्रतिशत आबादी बौद्ध धर्म को मानती है। बड़ी संख्या में बौद्ध धर्मावलंबी दूसरे धर्मो को अपना रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संघ समागम के अकादमिक सत्र को संबोधित करते हुए त्रिपुरा के बौद्ध धर्मगुरु धर्म प्रिया ने यह बातें कही। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में लगभग डेढ़ सौ बौद्ध भिक्षु परिवार ईसाई धर्म स्वीकार कर चुके हैं। धर्म परिवर्तन की इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए विशेष प्रयास करने होंगे।
सत्र के दौरान भिक्षुणी संस्कार, अहिंसक समाज निर्माण और बौद्ध शिक्षा के प्रचार-प्रसार में संघ की भूमिका पर चर्चा हुई। सार्वभौम धम्म की जरूरत यूरोपियन बुद्धिस्ट यूनियन के अध्यक्ष और फ्रांस के डैनी रिम्पोछे ने कहा कि अलग-अलग देशों के बौद्ध संगठनों को एक महासंगठन के नीचे लाने की आवश्यकता है। इसके लिए सार्वभौम धम्म की स्थापना होनी चाहिए।
आगे की स्लाइड्स में जानें बौद्ध धर्म के लिए क्या कर रहे हैं नीतीश, बुद्धिष्ट संस्कृति पर कैसा है दबाव...
सभी तस्वीरें... शेखर