पटना/मुजफ्फरपुर। प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह हों या सदी के नायक कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन। आध्यात्मिक गुरु निर्मल बाबा हों या भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल फूंकने वाले अन्ना हजारे या मनसे प्रमुख राज ठाकरे। युवा दिलों पर राज करने वाली ऐश्वर्या राय बच्चन हों या शाहरुख खान। सोनाक्षी हों या सलमान। शायद ही कोई सुधीर कुमार ओझा से बच पाया। ओझा पेशे से बिहार के मुजफ्फरपुर में एडवोकेट हैं।
दुनिया चाहे जो कहे। सुधीर ओझा को इससे फर्क नहीं पड़ता कि लोग उन्हें क्या कहते हैं। बहुत लोग कहते हैं कि उन्हें नाम कमाने का फितूर है तो कुछ इसे बिना वजह समय की बर्बादी मानते हैं। पर ओझा कहते हैं: मुझे तसल्ली होती है कि समाज के लिए मैं कुछ कर रहा हूं। लोकहित के बहुतेरे काम शिकायतों के बाद हुए। इससे आम लोगों को फायदा हुआ। ओझा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ तो मुकदमे किये ही, सामाजिक विकृतियों के विरोध में अदालत से हस्तक्षेप की कोशिश की।
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