आप ही बताएं, दिनदहाड़े 21 लोगों की हत्या आखिर किसने की!

आरा। बथानी टोला नरसंहार के सभी 23 दोषियों को रिहा करने का मलाल पीड़ित परिवारों को है। नरसंहार में परिवार के पांच सदस्यों को गंवाने वाले मुख्य गवाह नईमुद्दीन ने न्यायालय पर आस्था जताते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही। नईमुद्दीन देश के लोगों से एक ही सवाल पूछ रहे हैं, आप ही बतायें-दिनदहाड़े 21 लोगों की हत्या आखिर किसने की? ( और खबरों के लिए क्लिक करें )
1996 में हुआ था नरसंहार
भोजपुर जिला अंतर्गत सहार थाना क्षेत्र के बथानी टोले में 11 जुलाई 1996 को जमीन कब्जा करने के लिए दिनदहाड़े खून की होली खेली गई। इस घटना में 21 निदरेषों को खून के प्यासे लोगों ने तलवार काटा और गोलियों से भून डाला। मरने वालों में एक पुरुष के साथ 12 महिलाएं और आठ बच्चे शामिल थे। इस घटना की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बिना देर किये तात्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री इंद्रजीत गुप्ता ने बथानी टोला पहुंच कर पीड़ितों को न्याय दिलाने का भरोसा दिया था। इस घटना की देश ही नहीं विदेशों तक में आलोचना हुई थी।
दोषियों को किया बरी
इस फैसले के खिलाफ सजा पाये लोगों ने पटना हाईकोर्ट में अपील की। अपील पर सुनवाई करते हुए पटना उच्च न्यायालय ने पुलिस अनुसंधान को गलत ठहराते हुए ठोस साक्ष्य के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
फैसले पर जताई खुशी
रणवीर सेना प्रमुख बरमेश्वर मुखिया ने हाईकोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि सच और न्याय की जीत है। किसान और मजदूरों को एक साथ रहना कुछ लोगों को पसंद नहीं था। इस कारण समाज में नफरत पैदा हो गई थी। वहीं उन्होंने कहा कि दोनों मिल कर समाज में एक नई मिसाल कायम करेंगे।
केंद्रीय गृहमंत्री के दौरे के बाद दर्ज हुई थी प्राथमिकी
नरसंहार में केंद्रीय गृहमंत्री के दबाव के बाद स्थानीय पुलिस ने 33 लोगों को नामजद करने के साथ 35 अज्ञात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की। करीब चौदह वर्ष बाद 5 मई 2010 को आरा व्यवहार न्यायालय ने बथानी नरसंहार कांड में 23 लोगों को दोषी माना। तीन लोगों को फांसी के साथ 20 लोगों को आजीवन कारावास की मिली।







