पटना। बुद्ध का अस्थि कलश है तो बाबर का खंजर भी है। यहां आने पर राजगृह से पाटलिपुत्र के राजधानी बनने का इतिहास आंखों के सामने उतरने लगता है। यहां तिब्बती पेंटिंग है तो राजस्थानी कला चित्र के अद्भुत नमूने भी हैं।
इतिहास की यह थाती पटना म्यूजियम में है जो समय के घुमावों से होते हुए वर्तमान तक पहुंचती है। पर इन धरोधरों को लेकर लोक चेतना का अभाव खटकता है। शायद इसीलिए ऑल इंडिया म्यूजियम एनुअल कान्फ्रेंस का थीम है: टेक्रिकल अपग्रेडेशन ऑफ म्यूजियम एग्जिविशन एंड कम्युनिकेशन। इसका मकसद है कि देश के ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में आम लोगों की रुचि बढ़ायी जाये। लोगों तक म्यूजियम के बारे में कैसे संवाद कायम किया जाये?
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