राजग की एकता के लिए भाजपा का साथ दिया : शरद यादव

पटना/नयी दिल्ली।जदयू ने राजग की एकता को बनाए रखने के लिए और राज्यसभा में सभापति के रूप में डॉ. हामिद अंसारी की प्रतिकूल भूमिका को देखते हुए उपराष्ट्रपति के चुनाव में भाजपा का समर्थन किया है। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राजग के संयोजक शरद यादव ने राजग की बैठक के बाद पत्रकारों से कहा कि उनकी पार्टी ने पहले राज्यसभा की पूर्व उपसभापति नजमा हेपतुल्ला का नाम उपराष्ट्रपति पद के लिए प्रस्तावित किया था, लेकिन उन्होंने अपनी अनिच्छा जताई तो भाजपा ने जसवंत सिंह का नाम प्रस्तावित किया। जसवंत सिंह के नाम पर बैठक में सर्वसम्मति थी।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने राष्ट्रपति चुनाव की तरह उपराष्ट्रपति के चुनाव में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के उम्मीदवार का इसलिए समर्थन नहीं किया क्योंकि राज्यसभा में लोकपाल विधेयक को पारित कराने के समय सभापति के रूप में डॉ. अंसारी की भूमिका अच्छी नहीं थी। राज्यसभा में महिला विधेयक बिल को पारित कराने के समय में भी डॉ. अंसारी ने मार्शल को बुला लिया था। उन्होंने कहा कि वह सभापति के रूप में ऐसे उम्मीदवार का समर्थन करना चाहते थे जो विपक्ष को जनहित के सवालों को उठाने का मौका दे और समझदारी के साथ सदन को चलाए।
यादव ने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी ने प्रणव मुखर्जी का साथ दिया पर इसका मतलब यह नहीं कि राजग में कोई मतभेद है। आखिर सभी घटक दलों ने भारत बंद के दौरान और कई राष्ट्रीय मुद्दों पर राजग के बीच एकजुटता का परिचय दिया था। भाजपा द्वारा प्रस्तावित उम्मीदवार का समर्थन करने का मतलब यह है कि राजग अभी एक जुट है। राजग की बैठक में उनके नाम की भी चर्चा हुई थी, इस सवाल पर शरद यादव ने यह कहकर अपनी अनिच्छा जताई की कि उनका स्वभाव सदन को संचालित करने का नहीं है और ना ही वह सक्रिय राजनीति से संन्यास लेना चाहते हैं।






