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सरकार का फरमान, अब सप्ताह में होगी 45 घंटे की पढ़ाई

Bhaskar News | Jun 26, 2012, 11:00AM IST
 
 

पटना। प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षक नियुक्ति की प्रक्रिया के साथ-साथ शिक्षकों की जिम्मेवारी भी राज्य सरकार बढ़ाने जा रही है। स्कूलों में बच्चों के बीच शिक्षकों का ज्यादा से ज्यादा समय सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने नया फरमान जारी किया है। नए निर्देश के अनुसार राज्य के सभी प्रारंभिक विद्यालयों के शिक्षकों को प्रत्येक सप्ताह न्यूनतम 45 घंटे पठन-पाठन में देना होगा। यानी प्रत्येक महीने न्यूनतम 180 घंटे। हालांकि इस अवधि के दौरान पढ़ाने की तैयारी का समय भी शामिल होगा। इस आशय का निर्देश प्राथमिक शिक्षा निदेशक आशुतोष ने जारी किया है। सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों(डीईओ) को भेजे पत्र में निर्देश के कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने की बात कही गई है।



धीरे-धीरे लागू होगा आरटीई एक्ट



इस बाबत शिक्षा विभाग के प्रवक्ता राम शरणागत सिंह ने कहा कि प्रत्येक सप्ताह 45 घंटे के पठन-पाठन सुनिश्चित कराना ‘बच्चों की नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम-2009’(आरटीई एक्ट) के प्रावधानों के तहत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिनियम के प्रावधानों को विद्यालयों में धीरे-धीरे लागू किया जाएगा। फिलहाल नए रूटीन तामील कराने के लिए डीईओ स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को आदेश दिया जाएगा।



पहले भी मिल चुका है इस संबंध में निर्देश



बताते चलें कि आरटीई एक्ट के तहत प्रत्येक विद्यालय का क्षेत्र निर्धारित किया गया है। प्रत्येक स्कूल के निर्धारित क्षेत्रों के अंदर रहने वाले बच्चों को स्कूल तक लाने की जिम्मेवारी प्रारंभिक विद्यालयों के शिक्षकों को सौंपी जा चुकी है।



निर्देश का विरोध



राज्य सरकार का नया फरमान अभी शिक्षकों तक नहीं पहुंचा है। लेकिन इसका विरोध अभी से शुरू हो चुका है। नियोजित शिक्षक संघ के नेता प्रदीप कुमार पप्पू ने कहा कि शिक्षा विभाग नियोजित शिक्षकों का शोषण कर रही है। उन्होंने कहा कि नियोजित शिक्षकों को नए-नए फरमान भेजा जा रहा है। जबकि आंदोलन, धरना-प्रदर्शन के बावजूद शिक्षकों के मानदेय पर सरकार के स्टैंड में कोई बदलाव नहीं हुआ।
 
 
 

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