मानवाधिकार आयोग ने लिया बच्चेदानी घोटाले का संज्ञान, नोटिस जारी
पटना. मेडिकल इथिक्स को दरकिनार कर महिलाओं का गर्भाशय निकालना मानवाधिकार का उल्लंघन भी है। राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने की तैयारी कर दी है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एसएन झा ने भास्कर डाट कॉम से बातचीत में कहा कि ये बहुत ही गंभीर औैर विचलित करने वाली सूचना है कि कम उम्र की महिलाओं के गर्भाशय या तो निकाल दिये गये या उसे निकालने का दिखावा किया गया।
जस्टिस झा ने कहा कि आयोग इस मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने पर गौर कर रहा है। ध्यान रहे कि जस्टिस झा 1997 में तब सुर्खियों में आये थे जब पशुपालन घोटाले की जांच का जिम्मा पटना हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपा दिया था। उस वक्त जस्टिस झा घोटाले की सुनवायी करने वाली खंडपीठ के सदस्य थे।
करोड़ों का खेलः अनुमान है कि गर्भाशय निकालने के नाम पर करोड़ों के खेल हुए। 2005 से यह योजना शुरू हुई। एक गर्भाशय निकालने के एवज में दस हजार रुपये का भुगतान होता है। समस्तीपुर में अगर 13 सौ फर्जी गर्भाशय निकालने गये तो इसका मतलब हुआ कि एक करोड़ 30 लाख गटक लिये गये। अगर मान लिया जाये कि बिहार के 38 जिलों में एक साल में पांच सौ फर्जी ऑपरेशन हुए तो कुल मिलाकर 19000 ऑपरेशन होंगे और इस प्रकार 19 करोड़ का खेल हो गया।
मरीजों से भी वसूले गये पैसेः समस्तीपुर की जांच शिविर में पहुंची बीपीएल परिवारों की महिलाओं ने शिकायत की कि ऑपरेशन के एवज में उनसे पैसे भी लिये गये। यह पैसा भी अवैध कमाई कही जायेगी। समस्तीपुर में पांच दिवसीय जांच शिविर का आयोजन इस महीने के पहले सप्ताह में किया गया था।









