पटना। भारत में सर्वाधिक बाल विवाह बिहार में होता है। इसको लेकर दि एल्डर्स संस्था का एक प्रतिनिधिमंडल बिहार प्रदेश में कुछ ऐसे युवाओं से मिला, जो बाल विवाह की कुप्रथा को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। इस यात्रा का उद्देश्य राज्य सरकार को इस समस्या के समाधान हेतु प्रोत्साहित करना भी है।
आर्च बिशप डेसमंड टुटु, श्रीमती इला भटट, डा. ग्रो ब्रंडलैंड तथा श्रीमती मैरी रोबिन्सन आज सुबह-जागृति- नामक एक सामाजिक परिवर्तन अभियान से जुड़े करीब 20 युवाओं के एक दल से मिले। इन किशोरों ने दि एल्डर्स को बताया कि वे भारत के उस कानून के बारे में जागरूकता फैलाना चाहते हैं, जिसके तहत 18 वर्ष से कम आयु की लड़कियों और 21 वर्ष से कम के लड़कों का विवाह करना गैरकानूनी है। ये किशोर संपूर्ण बिहार के युवाओं को बाल विवाह रोकने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह भी लगता है कि बड़ों के सहयोग के बिना वे कामयाब नहीं हो पाएंगे।
दि एल्डर्स ने भारत में बाल विवाह की समस्या को ठीक से समझने के लिए अभिभावकों, शिक्षकों, कानून लागू करवाने वाले अधिकारियों और सामुदायिक नेताओं से भी मुलाकात की। बाल विवाह के मामले में बिहार का स्थान देश में सबसे ऊपर है। संस्था के सदस्य बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं प्रदेश भर के पंचायत नेताओं तथा वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों से भी मिलेंगे।
संस्था द्वरा एक सर्वे के हवाले से कहा गया है कि लड़कियों की कम उम्र में शादी के मामले में बिहार का स्थान भारत में सबसे ऊपर है, जहां 69 प्रतिशत स्त्रियों का विवाह 18 वर्ष से कम आयु में और 48 प्रतिशत स्त्रियों का विवाह 15 वर्ष से कम आयु में हो जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो 47 प्रतिशत स्त्रियों की शादी 18 वर्ष से कम आयु में कर दी जाती है।
दि एल्डर्स की दक्षिण अफ्रीका चेयर के आर्च बिशप डेशमंड टुटु ने बताया, बाल विवाह एक पारंपरिक प्रथा है, जिसका किसी क्षेत्र विशेष से संबंध नहीं है। यह प्रथा एशिया, अफ्रीका, मध्य-पूर्व आदि कुछ भागों में मौजूद है। मैं खासकर लड़कियों पर पड़ने वाले इसके दुष्प्रभावों की ओर ध्यान दिलाना है।