सासाराम। रोहतास और कैमूर जिले के जंगलों में ढाई दशक से समानांतर सत्ता चला रहे भाकपा माओवादियों के कमांडर अब लेवी की राशि को लेकर आपस में लड़ने लगे हैं। पहले से ही महिला के यौन शोषण का आरोप झेल रहे रोहतास-कैमूर के नक्सली संगठन में लेवी राशि को लेकर आपसी द्वंद्व पुलिस के लिए अच्छी खबर है। यह राहत सोमवार की सुबह कोबरा बटालियन द्वारा गिरफ्तार किये गये हार्डकोर नक्सली विनोद यादव की बयान ने पहुंचायी है।
आपस में हुआ है खूनी संघर्ष
विनोद ने बताया कि संगठन के जोनल कमांडर रमेश भुइंया और सब जोनल कमांडर मुन्ना विश्वकर्मा के बीच लेवी की राशि को लेकर शुरू हुआ संघर्ष खूनी जंग तक जा पहुंचा। इससे पहले वीरेंद्र यादव उर्फ राणा भी लेवी की राशि को लेकर गोलियों का शिकार हुआ था। विनोद यादव ने रोहतास पुलिस के समक्ष पूछताछ में संगठन से जुड़े कई तथ्यों का खुलासा किया है जिसमें महिलाओं के यौन शोषण से लेकर सरकारी योजनाओं में लेवी वसूली तक का विवाद शामिल है।
संगठन का एक गुट मनरेगा, आंगनबाड़ी एवं इंदिरा आवास से लेवी नहीं लेने का पक्षधर हैं तो दूसरा गुट किसी तरह से संगठन में पैसा आने की दलील पेश करते हुए कहता है कि हर हाल में हर योजना से लेवी मिलनी चाहिए। बिनोद यादव ने संगठन में जातीय संघर्ष और बाहरी भीतरी भावना को लेकर उत्पन्न हुए दरार पर भी अपनी सहमति जतायी है और कहा है कि हाल के दिनों में संगठन के कमांडर कई छोटी-छोटी बातों को लेकर आपस में बंटते दिखाई दे रहे हैं।