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EXCLUSIVE: बिहार में हुआ 1200 करोड़ रुपये का चावल घोटाला
अजय कुमार | Nov 23, 2012, 15:36PM IST

पटना. बिहार में इस बार चावल घोटाला हो गया है। करीब 1200 करोड़ रुपये की कीमत के चावल का पता नहीं है। सरकार की एजेंसी एसएफसी ने धान को मीलिंग के लिए राइस मिलों को दिया था। मिलों से छह लाख टन चावल नहीं मिला। इसकी कीमत 1200 सौ करोड़ रुपये होती है। सरकार ने केवल एक जिले में इस गोलमाल की जांच का जिम्मा विजिलेंस को दिया है। 32 राइस मिलों के खिलाफ एफआईआर किया गया है।
किसानों से धान खरीद के मामले में रिकार्ड का दावा करने वाली सरकार के होश तब फाख्ता हो गये जब तय मात्रा में राइस मिलों से चावल नहीं लौटा। बताया जाता है कि साल 2011-12 में एसएफसी ने 4 लाख 55 हजार टन और पैक्सों ने 17 लाख 5 हजार टन धान की खरीद किसानों से 1080 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद की। सरकार ने एसएफसी को धान खरीद के लिए नोडल एजेंसी बनाया है। एसएफसी से एफसीआई को चावल जाता है और वहां से पीडीएस के जरिये गरीबों तक पहुंचता है।
राज्य के सभी जिलों में धान की खरीद हो जाने के बाद उसे राइस मिलों को दे दिया गया। एक क्विंटल धान में चावल की रिवकरी 66 किलो होनी चाहिए। मोटे तौर पर कुल खरीदे गये धान से सरकार को 14.47 लाख टन चावल मिलनी चाहिए थी। लेकिन अब तक केवल 8.56 लाख टन की चावल मिल सका है। इस तरह करीब 6 लाख टन चावल नही मिल पाया है। 1900 रुपये चावल की दर निर्धारित है। इस आधार पर 6 लाख टन गायब चावल की कीमत करीब 1200 सौ करोड़ रुपये होती हैै। चावल रिकवरी के लिए सरकार ने 12 दिसंबर तक की तारीख तय की है। हालांकि मीलिंग का समय अप्रैल-मई तक होता है। धान की खरीद नवंबर से मार्च तक होती है। ऐसे में यह समझा जा सकता है कि चावल रिकवरी के लिए सात महीने की लंबी अवधि क्यों रखी गयी?
सूत्रों के अनुसार धान खरीद से लेकर उसे मीलिंग के लिए मिलों को देने तक की प्रक्रिया में जमकर गड़बड़ी हुई हैै। रोहतास जिले में तो एक दिन में ही 50 हजार टन की खरीद दिखायी गयी है। इसी प्रकार धान उत्पादन में फिसड्डी रहने वाले जिलों में भी बड़ी मात्रा में धान की खरीद की गयी है। जाहिर है कि इसका बड़ा खेल सिर्फ कागजों पर खेला गया है। अब धान की भरपाई कहां से होगी, यह बड़ा सवाल हैै।
एक-एक दाना वसूलेंगे: मंत्री
खाद्य व उपभोक्ता मामलों के मंत्री श्याम रजक से जब धान घोटाले पर भास्कर डॉट कॉम ने सवाल किया तो उनका कहना था: हम चावल का एक-एक दाना मिलों से वसूल करेंगे। अब तक हमने 32 मिलों पर प्राथमिकी दर्ज करायी है। मामले की व्यापक छानबीन की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमने जब धान खरीद कर राइस मिलों को दिया, तो हमें चावल मिलनी चाहिए।
सरकारी धन की बड़ी लूट, सीबीआई जांच हो: जगदानंद
पूर्व सिंचार्ई मंत्री और राजद सांसद जगदानंद सिंह ने कहा कि इस लूट में मुख्यमंत्री से लेकर नीचे तक लोग शामिल हैं। कागज पर धान की खरीद की गयी और अब कागज पर ही चावल जुटाये जाने की साजिश हो रही है। यह गड़बड़ी तभी शुरू हो गयी जब राज्य सरकार ने धान खरीद की केंद्र सरकार की निर्धारित प्रक्रिया को उलट दिया। अकेले कैमूर जिले में तकरीबन दौ सौ करोड़ रुपये का घोटाला कर लिया गया है। सरकार की नीतियों के चलते किसान मारे गये। एजेंसियों की जगह सीधे राइस मिलों ने 700 से 800 रुपये की दर पर धान की खरीद कर ली। इस तरह किसानों को एक क्विंटल पर दो से तीन सौ रुपये का नुकसान हुआ।







