राज्यदिल्ली
मध्य प्रदेश
राजस्थान
छत्तीसगढ़
हिमाचल
पंजाब
हरियाणा
चंडीगढ़
उत्तर प्रदेश
बिहार
झारखंड
महाराष्ट्र
गुजरात
जम्मू-कश्मीर
उधर मोदी का चल रहा था भाषण, इधर मीटिंग में व्यस्त थे नीतीश
अजय कुमार।
| Dec 22, 2012, 14:34PM IST

पटना। तीसरी बार लगागार जीत हासिल करने वाले गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी अहमदाबाद में समर्थकों-कार्यकर्ताओं को जीत के मतलब समझा रहे थे तो इधर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विभागों की मीटिंग में विजी थे। भाजपा कैंप में खुशी छलक रही थी मगर गठबंधन धर्म का पालन करते हुए बड़े नेता कुछ बोलने से बचते रहे। अगर बोले तो नपे-तुले अंदाज में।
अलबत्ता भाजपा कोटे से नीतीश सरकार में मंत्री गिरिराज सिंह कहते हैं: विकास का जो मॉडल नरेंद्र मोदी ने गुजरात में तैयार किया है, उन्हें प्रधानमंत्री होना चाहिए।
भाजपा के राज्य कार्यालय में सुबह से ही गहमागहमी थी। रिजल्ट आने के साथ ही कार्यकर्ता खुद को नहीं रोक पाये और पटाखे फोडक़र अपनी खुशी का इजहार करते रहे। पार्टी कार्यकर्ता नरेंद्र मोदी के समर्थन में प्रधानमंत्री पद के भावी दावेदार के तौर पर उनके समर्थन में नारेबाजी करते रहे।
नारे लग रहे थे
देश का पीएम कैसा हो, नरेंद्र मोदी जैसा हो। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ सीपी ठाकुर ने कहा: शानदार जीत के लिए मोदी जी को बधाई। हालांकि मुंह मीठा कर नेता-कार्यकर्ता अपनी भावना प्रकट करने में पीछे नहीं थे।
इस गहमागहमी के बीच पत्रकारों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रतिक्रिया जानने की बेसब्री थी। पर वे दिन से ही अलग-अलग विभागों की मीटिंग में व्यस्त रहे। जदयू खेमे में गुजरात के चुनाव परिणाम को लेकर निर्विकार वाला भाव कायम था। ऐसा लग रहा था जैसे इस चुनाव परिणाम को लेकर जदयू को कुछ भी लेना-देना नहीं है।
जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवानंद तिवारी से जब गुजरात के चुनाव परिणाम के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था: यह पहले से ही तय था। चुनाव पूर्व सर्वेक्षण से लेकर उसके बाद हुए सर्वे में यह बात आ चुकी थी कि वहां का परिणाम कैसा आने वाला है। जब उनसे पूछा गया कि क्या जीत की हैट्रिक पूरी करने के बाद मोदी की प्रधानमंत्री पद पर दावेदारी मजबूत होगी? उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग ही एक से अधिक बार कह चुके है कि उनके यहां एक नहीं, कई लोग हैं जो प्रधानमंत्री बनने के काबिल हैं।
शिवानंद ने कहा
हम चाहते हैं कि 2014 के लोकसभा के लिए प्रधानमंत्री का नाम पहले से ही तय हो जाये। एनडीए में बड़ा घटक दल होने के नाते भाजपा का यह अधिकार है कि वह प्रधानमंत्री के उम्मीदवार चुने। उसके बाद एनडीए की बैठक में उस पर विचार होगा। उन्होंने कहा कि देश की ऐसी बनावट है जिसमें समन्वयारी विचारों वाले व्यक्ति को प्रधानमंत्री होना चाहिए। क्या नरेंद्र मोदी समन्वयकारी नहीं हैं? उन्होंने कहा: हम किसी का नाम नहीं लेना चाहते।







