'ना तो मुझे राजनीति आती है, ना ही गडकरी को मैंने अध्यक्ष बनाया'
Source: विवेक विकास | Last Updated 10:14(06/02/12)
पटना। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि मुझे राजनीति नहीं आती और न ही मैंने नितिन गडकरी को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है। लोकसभा चुनाव में हार की मायूसी थी। भाजपा में तीन-चार नामों के प्रस्ताव थे। आखिर में गडकरी का नाम बचा था। वे तैयार नहीं थे। स्वयंसेवक और एक ही क्षेत्र का निवासी होने के नाते मैंने गडकरी को जिम्मेवारी संभालने का आदेश दिया..। पटना प्रवास के दौरान रविवार को भागवत ने कई अन्य मुद्दों पर बेबाक राय रखी।
शाखा चलाते हैं, राजनीति नहीं : आडवाणीजी मेरे पिताजी के बराबर हैं। उनको मैं चलाऊं, ऐसा नहीं हो सकता। हम तो शाखा चलानेवाले लोग हैं। हमें राजनीति नहीं आती। बीजेपी इतनी बड़ी पार्टी है कि कोई पर्दे के पीछे से उसे नहीं चला सकता।
मुसलमानों से परहेज नहीं : मुसलमानों से परहेज हमको नहीं, आनेवालों को हो सकता है। वातावरण ऐसा नहीं है। इसके लिए हिंदू समाज को ठीक होना होगा। हमारे लोग मुसलमानों से बातचीत कर रहे हैं।
अन्ना आंदोलन में संघ नहीं : संघ के बहुत कार्यकर्ता हैं। वे आंदोलन में जा सकते हैं। हमने तो यही कहा कि सब आंदोलन वाले एक जगह हो जाएं।
सुरक्षा खतरे में : नक्सलवाद और आतंकवाद से देश की संप्रभुता को खतरा है। आतंकवाद दर्द है, इलाज नहीं। विकास जरूरी है।
करकरे पर था दबाव : मैं एटीएस चीफ हेमंत करकरे से मिलने मुंबई गया था। रात को हम मिले थे। तब करकरे ने कहा था, ‘आतंकवाद मामले में पकड़े गए लोगों का संघ से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन संघ को फंसाना है। ऊपर से बहुत दबाव है।’ हफ्तेभर में आतंकी हमले में उनकी मौत हो गई।
समाज से उम्मीदें : मेरी आशा राजनीति से नहीं समाज से है। सारे दलों के अच्छे लोग एकत्र होकर समाज की ओर से राजनीति को डील करें।