पटना। भोजपुरी फिल्मों का इतिहास काफी समृद्ध रहा है। पहली भोजपुरी फिल्म गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो थी। ये फिल्म सन 1962 में रिलीज हुई थी और जबरदस्त हिट रही थी। तब इस फिल्म को बनाने में देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद का सहयोग अतुलनीय था।
राजेंद्र प्रसाद के बाद संजय दत्त की नानी और नरगिस दत्त की मां जद्दन बाई ने भी काफी सहयोग किया था। तत्कालिक बिहार ( वर्तमान में झारखंड) के गिरिडीह के व्यवसायी विश्वनाथ शाहाबादी इस फिल्म के निर्माता थे। वहीं इस फिल्म में कुंदन कुमार के निर्देशन में कुमकुम और असीम कुमार ने प्रमुख भूमिका निभाई थी।
ब्लैक एंड व्हाइट में बनी इस फिल्म के निर्माण के पश्चात दिल्ली मे इसके प्रीमियर का आयोजन किया गय़ा जिसमें जगजीवन राम, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री सहित कई मंत्री और दिग्गज नेता मौजूद थे।
महज 5 लाख की लागत से बनी इस फिल्म ने उस समय 75 लाख रुपये का व्यवसाय किया था। फिल्म को बिहार के अलावा, दिल्ली, यूपी, मद्रास(चेन्नई) में भी जबर्दस्त सफलता मिली थी। फिल्म का संगीत बिहार के रहने वाले चित्रगुप्त ने दिया था तो वहीं मोहम्मद रफी ने कई गीतों में अपनी आवाज दी थी। फिल्म के साथ साथ गाने भी जबरदस्त हिट हुए थे। इसके बाद कई भोजपुरी फिल्में बनी। जो जबरदस्त हिट साबित हुईं। इन फिल्मों की सफलता के जरिए भोजपुरी के कई स्टार भी बने, जिसमें सुजीत कुमार, कुणाल सिंह आदि थे। इनकी फिल्में भी जबरदस्त हिट हुईं।
भोजपुरी फिल्मों ने जो पैमाना स्थापित किया था उससे ऐसा लगने लगा था मानो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के समानांतर भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री भी चलने लगेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। 1985 से वर्ष 2000 तक भोजपुरी फिल्मों की स्थिति ठीक-ठाक नहीं रही। इस दौरान काफी कम फिल्में ही लोगों को देखने को मिली।
मोहन जी प्रसाद ने सईंया हमार से भोजपुरी फिल्मों में दोबारा वापसी की, जिसमें बतौर हीरो रवि किशन थे। इसके बाद लगातार भोजपुरी फिल्में आ रही हैं। वर्तमान में मनोज तिवारी, रवि किशन, दिनेश लाल यादव निरहुआ, पवन सिंह की फिल्में लोग खूब पसंद कर रहे हैं। यहां तक की भोजपुरी फिल्मों का असर ऐसा हुआ कि हिंदी फिल्मों के महानायक अमिताभ बच्चन, अजय देवगन सरीखे बड़े स्टारों ने भी इन फिल्मों में काम किया।
सफलता से इतर भोजपुरी फिल्मों में एक बहुत बड़ी खामी ये हैं कि इन फिल्मों के जरिए काफी हद तक अब अश्लीलता परोसी जाने लगी है। हर फिल्म में इंटिमेंट सीन जबरदस्ती डाले जा रहे हैं, और पश्चिमी सभ्यता को दिखाया जा रहा है। वहीं भोजपुरी संस्कृति को नजरअंदाज किया जा रहा है। जबकि इन पूर्वी क्षेत्रों की संस्कृति इतनी समृद्ध है कि अगर उन्हें रूपहले पर्दे पर दिखाया जाए तो लोग उससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकेंगे।
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हत्यारा है हमारा थानेदार, उस पर चलाओ मुकदमा, नहीं तो..हाईफाई डिग्री ली, किया देश गद्दारी लेकिन..