पटना। साल के छठे महीने की ऐसी शुरुआत की कल्पना भी नहीं थी किसी को। पहली जून को राज्य के आरा शहर में रणवीर सेना के प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया को गालियों से छलनी कर दिया गया। मौके पर ही उनकी सांस टूट गयी। मुखिया पर साढ़े तीन सौ से ज्यादा दलितों, अकलियतों को मौत के घाट उतारने का आरोप था।
हत्या के सातवें महीने बाद भी इसकी गुत्थी अब तक अनसुलझी है। पांच लोगों को पुलिस ने जरूर गिरफ्तार किया है। पर अभय पांडेय और फौजी नामक संदिग्ध पकड़ से अब भी दूर है। राज्य के डीजीपी अभयानंद इस हत्याकांड को आपसी वर्चस्व की लड़ाई का परिणाम मान चुके हैं। लेकिन मुखिया के बेटे इंदुभूषण का सीधा आरोप है कि सरकार असली हत्यारों को बचा रही है।
आखिर कौन हैं असली हत्यारे?
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