पटना। बिहार से फरार 11 नेपाली माओवादियों के खिलाफ सारे मुकदमे वापस लेने के राज्य सरकार के फैसले पर कोर्ट ने मंजूरी प्रदान कर दी है। बिहार सरकार ने इसके लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश वशिष्ठ नारायण सिंह ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने फैसले का आधार बिहार सरकार का अनुरोध और भारत-नेपाल संबंधों को बनाया है। लोक अभियोजक जयप्रकाश सिंह ने भी कोर्ट के सामने इसी दलील को रखा था।
उल्लेखनीय है कि पुलिस ने वर्ष 2004 में पटना के एक होटल से 11 नेपाली माओवादियों को गिरफ्तार किया था। इनके पास से एक लाख, 66 हजार नकद, नक्सली साहित्य, मोबाइल, सिमकार्ड एवं कई संदिग्ध फोन नंबर मिले थे।
इनकी गिरफ्तारी के बाद सभी को जेल भेज दिया गया। दो वर्ष बाद 2006 की जून-जुलाई में इन्हें पटना हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। जमानत मिलने के बाद सभी माओवादी फरार हो गए और फिर कभी कोर्ट में पेश नहीं हुए। नेपाल में सत्ता परिवर्तन के बाद सभी विशेष पदों सांसद, पोलित ब्यूरो सदस्य आदि पर चयनित हो गए। ऐसे में नेपाल के प्रधानमंत्री ने भी इसके लिए पहल की थी।
माओवादियों के नाम
चित्र बहादुर श्रेष्ठ, लोकेंद्र सिंह, कुमार दहाल, रंजू थापा, कुलबहादुर केसी उर्फ सोनम उर्फ राजेन्द्र थापा, हित बहादुर तमांग, अनिल शर्मा, दिलीप महारंजन, मिन प्रसाद अपागाई, सुमन तमांग, श्याम किशोर प्रसाद यादव।