गंभीर बीमारियों पर नहीं करनी होगी माथापच्ची

राहत की बात - स्वास्थ्य बीमा के मानकीकरण के तहत इरडा ने क्रिटिकल डिजीज में शामिल की हैं 11 बीमारियां
बढिय़ा कदम - एलोपैथिक के अलावा आयुर्वेद, यूनानी और सिद्धा को ऑल्टरनेटिव ट्रीटमेंट की परिभाषा में शामिल किया गया है। पहले इसको लेकर स्पष्टता नहीं थी
स्वास्थ्य बीमा लेने वाले ग्राहकों को अब क्रिटिकल डिजीज और प्री-एग्जिस्टिंग डिजीज (पहले से ही बीमारी) को लेकर माथापच्ची करने से निजात मिल जाएगी। बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने स्वास्थ्य बीमा के मानकीकरण के तहत क्रिटिकल डिजीज में 11 डिजीज को शामिल किया है।
यानी अब सभी बीमा कंपनियां की क्रिटिकल डिजीज (गंभीर बीमारी) की परिभाषा में कम से कम 11 डिजीज शामिल होंगी। इरडा की ओर से जारी किए गए दिशा-निर्देश में स्वास्थ्य बीमा में इस्तेमाल किए जाने वाले 46 टम्र्स के लिए साझा परिभाषा तय की गई है। यह सभी बीमा कंपनियों पर लागू होगी। इससे ग्राहकों को स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के शब्दों और तौर-तरीकों (प्रेक्टिसेज) को समझना आसान होगा।
निजी क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनी बजाज ऑलियांज जनरल इंश्योरेंस के स्वास्थ्य बीमा प्रमुख सुरेश सुगाथन ने 'बिजनेस भास्कर' को बताया कि स्वास्थ्य बीमा के मानकीकरण के तहत अब प्री-ऑथराइजेशन या कैशलेस क्लेम के लिए एक समान फॉर्मेट तय किया गया है। पहले कंपनियों के फॉर्मेट में अंतर होता था।
सुगाथन के मुताबिक, दिशा-निर्देश में ऑल्टरनेटिव ट्रीटमेंट की परिभाषा भी तय की गई है। इसके मुताबिक एलोपैथिक के अलावा आयुर्वेद, यूनानी और सिद्धा को ऑल्टरनेटिव ट्रीटमेंट की परिभाषा में शामिल किया गया है। पहले इसको लेकर स्पष्टता नहीं थी। पहले कोई कंपनी आयुर्वेद कवर देती थी, कोई कंपनी नहीं देती थी।
अब बीमा कंपनियां ऑल्टरनेटिव ट्रीटमेंट को पॉलिसी में शामिल कर सकती हैं। इसके साथ ही दिशा-निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि हॉस्पिटल में अगर मरीज भर्ती होता है तो क्या कवर होगा या क्या कवर नहीं होगा। उदाहरण के लिए कोई हॉस्पिटल अगर मरीज को खाना देता है तो वह उसे भी कवर करता है, कोई नहीं करता है। अब इसको लेकर स्पष्टता होगी।
अब सभी बीमा कंपनियां स्वास्थ्य बीमा उत्पादों को फाइल एंड यूज फॉर्मेट के तहत बीमा नियामक के पास फाइल कर सकती हैं। अगर इरडा की ओर से 60 दिन तक उत्पाद को लेकर कोई सवाल बीमा कंपनी से नहीं पूछा जाता है तो बीमा कंपनी उत्पाद बाजार में उतार सकती है।
इससे बीमा कंपनियों को नए उत्पाद लांच करने में आसानी होगी। ग्रुप स्वास्थ्य बीमा उत्पादों में इसे लागू करने के लिए इरडा ने 1 जुलाई 2013 और दूसरे स्वास्थ्य बीमा उत्पादों में इसे लागू करने की समय सीमा 1 अक्टूबर 2013 तय की है। हालांकि, नियामक ने बीमा कंपनियों इसे जल्द से जल्द अपनाने की अपेक्षा की है।







