न जाने क्यूं पुलिस ने जब उनमें से कुछ को पकड़ा, तो उन्हें पुलिस स्टेशन, उनके चेहरे पर कपड़ा डालकर ले गए। खोलिए मुंह उनका... हम उन वहशी जानवरों का चेहरा देखना चाहते हैं और चाहते हैं कि वो भी हमारी सूरत देखें और जानें की हम उन्हें किन नजरों से देखते हैं। देश का कानून यदि अवसर देता, तो उन्हें बाजार में खुला छोड़ देना चाहिए था। फिर हम सब स्वयं उन्हें अपना कानून चखा देते। उन पर जब वही हरकत होती, जो उन्होंने उस बेचारी बच्ची के साथ किया, तब उन्हें पता चलता और समाज के और दरिंदों को भी कि बलात्कार के मायने क्या होते हैं।