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'आशा की फिल्म 'माई' लोगों पर जबरदस्त छाप छोड़ेगी'

dainikbhaskar.com | Sep 08, 2012, 19:17PM IST
 
 

फिल्म मेकर महेश कोडियाल ने dainikbhaskar.com से हुई खास बातचीत में बताया कि उनकी फिल्म 'माई' लोगों पर जबरदस्त छाप छोड़ेगी।

दिल को झकझोर देने वाली ऐसी स्टोरी पर काम करने का आइडिया आपको कहां से मिला?

यह एक वास्तविक जीवन की घटना है जिसने मेरे मन पर एक अमिट प्रभाव छोड़ा। मैंने इसका फैसला चब किया जब मैंने एक बूढ़ी औरत को स्कूटर में बैठे देखा। उन्होंने अपने बेटे का सहारा ले रखा था। दूर से देखने में तो वे ठीक लग रही थीं, लेकिन कुछ तो गड़बड़ थी। मेरी कार उनके स्कूटर के बगल में खड़ी थी, वो मेरे कार को छुने की कोशिश कर रही थीं। उनके बेटे ने उनका हाथ नीचे खींच लिया लेकिन उन्होंने फिर वही किया। जब मैंने उनके बेटे से उनके बारे में पूछा तो उसने कहा, 'बुढ़ापा है, होता है।' यह बात मेरे जहन में घर कर गई। जब मैंने एक दोस्त से इस बात का जिक्र किया जो मेडिकल फील्ड में है, उसने कहा, 'वह औरत अल्जाइमर की मरीज थी।' मेरा शुरुआती आइडिया इस विषय पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने का था लेकिन दोस्तों और परिचितों ने सलाह दी कि इसका इस्तेमाल मैं फिल्म बनाने में करूं।

आपने कुछ मराठी फिल्म प्रोड्यूसर्स से भी संपर्क किया था?

हां, मैंने किया था। मैंने इस विषय को अनोखे तरीके से ट्रीट करने की सलाह दी थी। जब मैं एक्टर सुलभा देशपांडे से मिला, उन्होंने कहा, "मराठी में यह फिल्म बनाना बहुत कठिन है।" क्योंकि, वे जानती थीं कि इस विषय पर मराठी प्रोड्यूसर्स का रिएक्शन क्या होगा। उन्होंने कहा, "अगर आपको कोई मराठी प्रोड्यूसर मिलता है, तो मुझ 11 लाख रुपए दीजिएगा मैं आपके फिल्म में काम करूंगी।" संगीतकार नितिन शंकर की मदद से एक प्रोड्यूसर मिला लेकिन उन्होंने मुझसे कहा, "चूंकि यह एक नेशनल इंपोर्टेंस का मुद्दा है, इसलिए इसे आपको हिन्दी में बनाना चाहिए।"

क्या आपको लगता है कि यह फिल्म भारतीय सिनेमा को एक नई दिशा देगा?

यह एक ऐसी कहानी है जो किसी के साथ रिलेट कर सकती है। जो लोग फिल्म देख चुके हैं वे अल्जाइमर का दर्द अब बेहतर समझते हैं। मुझे याद है कि जब मैं फिल्म बना रहा था, मेरे एक दोस्त ने बहुत ही मार्मिक उदाहरण साझा किया था। उसने कहा, "तुम्हारी फिल्म देखने के बाद मुझे अपने अंकल की याद आ गई वे भी बिल्कुल आशा जी (वे फिल्म में लीड रोल में हैं) जैसे ही बिहैव करते थे। अगर यह फिल्म तब बन गई होती तो हमें इस बीमारी के बारे में पहले से पता चल जाता और इसके इलाज के बारे में भी।" मुझे पता है कि फिल्म 'तारे जमीं पर' जैसी है और लोगों को थोड़ा हट कर सोचने के लिए मजबूर करेगी। मुझे पूरा यकीन है कि मेरी फिल्म 'माई' दर्शकों पर लंबे समय तक के लिए छाप छोड़ जाएगी।
 
 
 

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