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चार्ल्स डिकेन्स का अपने बेटे को पत्र# अपने स्वार्थ के लिए ऐसा मत करना

dainikbhaskar.com | Mar 08, 2013, 13:28PM IST
 
 

 
मशहूर साहित्यकार चाल्र्स डिकेन्स का छोटा बेटा एडवर्ड बुलवर लिटन उच्च शिक्षा के लिए 26 सितंबर 1868 को ऑस्ट्रेलिया चला गया था। वे उसे प्लोर्न बुलाते थे। बेटे के दूर होने से डिकेन्स बेहद दुखी थे। उन्होंने अपने कई दोस्तों को लिखे पत्रों में इसका जिक्र भी किया। क्रिसमस की रात उन्होंने एडवर्ड को आने वाली जिंदगी के मायने बताते एक पत्र लिखा।
 
मेरे प्यारे प्लोर्न
मैं यह खत आज तुम्हें इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि मैं चाहता हूं कि मुझसे दूर होने के बाद हमारे अलग होने के वक्त के कुछ लफ्ज तुम आज और कई बार याद करो। मैंने तुम्हें नहीं बताया कि मैं तुमसे कितना प्यार करता हूं। मैं माफी मांगता हूं कि मैं तुमसे अलग हो गया हूं। मगर, यही जिंदगी है। यहां जुदाई और उससे होने वाला दर्द निश्चित है। मेरा विश्वास कहता है कि तुम वही जिंदगी जिओगे जो तुम्हारे लिए सर्वश्रेष्ठ होगी। मुझे लगता है तुम्हारे लिए स्वतंत्र होना जरूरी है। जिंदगी में किसी प्रोफेशन को अपनाने के लिए प्रशिक्षण जरूरी है।
 
 
 आज तक तुम्हारी जिंदगी में हर चीज का एक सीधा उद्देश्य रहा है। मैंने तुम्हें हर उस चीज के लिए प्रेरित किया जो तुम करना चाहते थे। मगर, मैं तुम्हें यह बता दूं कि जब मैंने पहली बार अपना पेट भरने के लिए नौकरी की थी तब मैं तुमसे भी छोटा था। एक बात याद रखना जिंदगी में अपने मतलब के लिए कभी किसी का फायदा मत उठाना। कभी भी अपने से अधीन लोगों पर सख्त मत होना। 
 
 
हमेशा दूसरों से वैसा व्यवहार करना जिस तरह के व्यवहार की अपेक्षा तुम उनसे करते हो। अगर वे लोग कभी हार जाएं तो मन छोटा मत करना। मैं नहीं चाहता कि तुम कभी उस ईश्वर द्वारा लिखे गए किसी भी नियम को तोड़ो। मैंने तुम्हारी किताबों में एक नई टेस्टामेंट रखी है। 
 
 
बिल्कुल उसी उम्मीद के साथ जिस उम्मीद के साथ तुम्हारे छोटे होने पर तुम्हारे हिसाब लिखा करता था। यह दुनिया की सर्वश्रेष्ठ किताब है। यह तुम्हें दुनिया के ऐसे पाठ पढ़ाएगी जो शायद ही कोई अपने कर्तव्य के प्रति बहुत ईमानदार व्यक्ति भी तुम्हें सिखा सके। तुम्हारे सभी भाइयों को भी एक-एक कर घर से दूर जाना पड़ा। उन्हें भी मैंने जीवन की यह जरूरी बातें बताई थीं।  तुम्हें याद होगा कि तुम घर पर शायद ही कभी किसी तरह के धार्मिक विश्वासों से जुड़े रहे हो। 
 
 
 
मैंने कभी नहीं चाहा कि मेरे बच्चे यह सब करें जब तक कि वे इन विश्वासों पर अपनी राय कायम करने जितने बड़े न हो जाएं। मैं खुश हूं कि तुम ईसाई धर्म की खूबसूरती और सच्चाई पर विश्वास करने लगे हो। मैं तुमसे सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि तुम सुबह और शाम जो भी निजी प्रार्थना अपने ईश्वर से करते हो उसे कभी मत छोड़ना। मैंने भी इसे कभी नहीं छोड़ा और आज मैं इससे बहुत अच्छा महसूस करता हूं।  मुझे उम्मीद है कि तुम पूरी जिंदगी यह कहोगे कि तुम्हारे पापा अच्छे थे। तुम अपना प्यार और भावनाएं उन्हें सही तरह बता नहीं पाए। या अपने कर्तव्य पूरे कर उन्हें ज्यादा खुश नहीं कर पाए। 
 
 तुम्हारे प्यारे पापा
 

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