प्रोफ़ेसर अबुल पाकिर जैनुलआब्दीन अब्दुल कलाम ने तमिलनाडु के एक छोटे से तटीय शहर में अख़बार बेचने से लेकर भारत रत्न तक का लंबा सफ़र तय किया है। चेन्नई से क़रीब 300 किलोमीटर दूर रामेश्वरम में 10 साल के स्कूली बच्चे अब्दुल कलाम अपने ग़रीब परिवार के भरण पोषण के लिए हर सुबह अख़बार बेचा करते थे।
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