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केमिकल फैक्ट्री में ब्लास्ट, 4 जिंदा जले

मनोज राजपूत | May 01, 2012, 03:06AM IST
 
 


लालड़ू. चंडीगढ़-अंबाला हाईवे पर लालड़ू से करीब दस किलोमीटर दूर गांव बसौली स्थित दशमेश मेडिकेयर फैक्ट्री में सोमवार सुबह दो धमाकों के बाद लगी भीषण आग में चार वर्कर जिंदा जल गए, जबकि 15 झुलस गए। दो वर्कर लापता हैं।

घायलों को डेराबस्सी के सिविल व प्राइवेट अस्पतालों में पहुंचाया गया, जहां से गंभीर जख्मी दस वर्कर्स को चंडीगढ़ के पीजीआई, जीएमसीएच व इंस्कॉल अस्पताल में शिफ्ट किया गया। कंपनी के महाप्रबंधक अतुल चौबे के मुताबिक हादसे के समय 31 लोग ड्यूटी पर थे। पुलिस ने जानलेवा लापरवाही के आरोप में फैक्ट्री मालिक व प्रबंधकों के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 के तहत केस दर्ज किया है।

रिएक्टर फटने से हुआ हादसा

हादसा सुबह करीब 6.50 बजे पर फैक्ट्री की पहली मंजिल पर रिएक्टर फटने से हुआ। हादसे का कारण केमिकल मिश्रण के दौरान हुआ विस्फोट बताया गया है, जिसकी बाकायदा जांच की जा रही है। डिप्टी डायरेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज एनपी बेरी के अनुसार रिएक्टर में तापमान बढ़ने से उसमें प्रेशर बन गया और टाइम पर सेफ्टी वॉल्व न खुलने से हादसा हो गया।

जोरदार धमाके के साथ हुए विस्फोट के बाद आग तेजी से फैल गई। 7.05 बजे एक और बड़ा धमाका हुआ, इसके बाद आग बेकाबू हो गई। आग बुझाने के लिए डेराबस्सी व दप्पर आयुध डिपो से दो और नाहर ग्रुप की एक फायरब्रिगेड सबसे पहले पहुंची। बाद में चंडीगढ़, अंबाला व मोहाली से भी फायर ब्रिगेड पहुंची। करीब ढाई घंटे बाद आग पर काबू पा लिया गया।

दमकल गाड़ियों के पास इतना भी समय नहीं था कि पानी भरने ठिकानों पर लौट सकें। गाड़ियों को आसपास के गांवों के जोहड़ों से पानी भरना पड़ा। गनीमत रही कि इलेक्ट्रीशियन ने फैक्ट्री की बिजली सप्लाई का मेन स्विच ऑफ कर दिया था।

शिनाख्त के लायक नहीं रहे शव

केवल एक मृतक निरंकार सिंह की शिनाख्त हो पाई है। उन्हें भी चेहरे से नहीं, बल्कि जेब से मिले बार काउंसिल के अधजले कार्ड से पहचाना गया। वह फैक्ट्री में शिफ्ट इंचार्ज थे और मूल रूप से गुड़गांव के रहने वाले थे। अन्य तीन शव तो शिनाख्त के काबिल भी नहीं रहे। दो वर्कर्स के शव खिड़की में टंगे मिले, तेज आग से बचने के लिए उन्हें नीचे कूदने का भी वक्त नहीं मिला। वर्कर्स के परिजन बदहवासी में जले शव देख और उद्वेलित हो उठे। एसएमओ जेके बंसल के अनुसार दो दिन तक शिनाख्त नहीं हो पाई तो शवों को डीएनए टेस्ट के लिए पटियाला भेजा जाएगा।

डीसी व एसएसपी ने बताया कि हादसे में फैक्ट्री प्रबंधकों की लापरवाही सामने आई है। मौके पर इंडस्ट्रियल सेफ्टी व आग बुझाने के प्रबंध नाकाफी पाए गए। डिप्टी डायरेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज को जांच के आदेश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल तीन दिन के अंदर जांच रिपोर्ट मांगी है।

मृतकों के परिवार को 7 लाख

डीसी वरुण रूजम ने मृतकों के परिवार को दो-दोलाख मुआवजे की घोषणा की है। कंपनी के महाप्रबंधक अतुल चौबे ने मृतकों के आश्रितों को 5 लाख रुपये, मृतक की 58 साल तक बची सर्विस तक वेतन और परिवार के सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की है।

इंडस्विफ्ट की यूनिट

दशमेश मेडिकेयर कंपनी फार्मास्युटिकल ग्रुप इंडस्विफ्ट लैब्स की यूनिट है। पंजाब के पूर्व सीएम हरचरण सिंह बराड़ की बेटी बबली बराड़ से करीब एक साल पहले इसे इंडस्विफ्ट ने टेकओवर किया था। कंपनी केमिकल मिश्रण द्वारा बल्क ड्रग्स तैयार करती है।

वातावरण में जहर घोल गए रसायन, स्कूलों में छुट्टी

हादसे के बाद गैस में तबदील हुए रसायन वातावरण में जहर घोल गए। विस्फोट के बाद आसमान में गुलाबी रंग का गुबार बन गया। इन रसायनों की चपेट में आए लोगों की आंखों और गले में जलन होने लगी। घटनास्थल के सबसे नजदीक सरकारी मिडिल स्कूल, मलकपुर में एक शिक्षिका समेत कई स्कूली बच्चों को उलटी आ गई। डीईओ, मोहाली विनोद कुमार ने दौरा कर सुरक्षा कारणों से स्कूल की छुट्टी कर दी। उन्होंने बताया कि हवा का रुख मलकपुर की ओर होने से रसायन का असर वहां ज्यादा था। इस बीच साथ लगते कुछ गांवों के प्राइवेट स्कूलों ने भी छुट्टी कर दी।

ये हुए घायल

घायलों में राजकुमार वर्मा, अशोक कुमार, रणधीर सिंह, सोबिंदु, छोटे राम, संतोष, कपिल, सुनिल, महेंद्र अवस्थी, आशू व मुनिलाल को डेराबस्सी के प्राइवेट अस्पतालों और रामनरेश, सुखबीर, बेचंद व संजीव कुमार को डेराबस्सी सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। राजकुमार, अशोक, रामनरेश, बेचंद व सुखबीर को छोड़ सभी को चंडीगढ़ के अस्पतालों में रेफर कर दिया गया।

 
 
 

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