'धरती के भगवान' की जिम्मेदारी पर एक और दाग!
Source: Bhaskar News | Last Updated 02:58(09/02/12)
चंडीगढ़. जीएमएसएच-16 में बुधवार की शाम एक मासूम बालक की समय पर इलाज न मिलने से मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि इमरजेंसी में लगभग 40 मिनट तक डॉक्टरों ने बच्चे को देखा तक नहीं, बाद में चेकअप के बाद उसे मृत घोषित कर दावा किया कि बच्चे की मौत 4 घंटे पहले ही हो चुकी है।
हालांकि मासूम को अस्पताल पहुंचने के बाद दो बार उल्टी भी हुई। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा किया और लिखित शिकायत पुलिस को दी। घटना के बाद कोई सीनियर डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचा।
आरोपी डॉक्टर भी इमरजेंसी से फरार हो गए। हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. राजीव बढ़ेरा व डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. जी दीवान दोनों ने देर रात फोन तक नहीं उठाया। कजहेड़ी निवासी लड्डू तिवारी अपने 45 दिन के इकलौते बच्चे को सुबह रामदरबार स्थित ईएसआई डिस्पेंसरी में डीपीटी का टीका लगवाने ले गया था। वहां डॉ. हरप्रीत ने बच्चे को डीपीटी, हैपेटाइटिस बी का टीका लगाने के साथ ही पोलियो की खुराक भी दी।
फिर तिवारी पत्नी सुधा के साथ सेक्टर-17 घूमने आ गया। यहां बच्चे को उल्टी होने के साथ ही हालत बिगड़ने लगी। तिवारी का कहना है कि शाम लगभग पौने चार बजे अपने बच्चे को लेकर जीएमएसएच में पहुंचा। 40 मिनट तक स्टाफ से मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन किसी ने बच्चे को देखा नहीं। डॉ. परमजीत सिंह ने निरीक्षण करने के बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया।
कार्ड कहता है लापरवाही हुई: अस्पताल में बच्चे का जो कार्ड बनाया गया उसमें भी अस्पताल की लापरवाही साफ झलकती है। शाम 5.06 बजे कार्ड में अंकित किया गया है कि बालक इमरजेंसी में 4.15 बजे पहुंचा, 4.35 बजे उसका इलाज शुरू हुआ और शाम 4.40 बजे उसे ब्रॉड डैड घोषित किया गया।
‘इलाज में नहीं की गई कोई लापरवाही’
बच्चे के इलाज में कोई लापरवाही नहीं हुई। जहां तक उल्टी का सवाल है तो पेट में अगर कुछ खाने पीने का सामान होता है तो मौत के बाद हिलने डुलने पर वह बाहर आ सकती है।
- डॉ. परमजीत सिंह, जीएमएसएच-16