चंडीगढ़ में प्रति हजार पर 12 बच्चे मिर्गी से पीड़ित
Source: Bhaskar News | Last Updated 02:39(09/02/12)
चंडीगढ़. चंडीगढ़ में एक सर्वेक्षण के मुताबिक प्रति एक हजार पर 12 बच्चे मिर्गी के रोग से पीड़ित हैं। सर्वे में सामने आया है कि शहरी इलाके में यह आंकड़ा 9 प्रति हजार जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 16 बच्चे प्रति हजार हैं। पीजीआई में बुधवार को एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के बाल रोग विशेषज्ञ प्रो.सुनीत सिंघी एवं चाइल्ड न्यूरोलॉजिस्ट डॉ.प्रतिभा सिंघी ने इसकी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि अगर बच्चे को एकाएक झटका लगता है और वह चौंक जाता है तो यह मिर्गी (एपीलेप्सी) का लक्षण हो सकता है। बच्चे को समय पर इलाज दिया जाए तो वह पूरी तरह से ठीक हो सकता है, अन्यथा उसके दिमाग पर इसके हानिकारक प्रभाव हो सकते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक दुनिया में प्रति हजार बच्चों में 7 बच्चे मिर्गी रोग से पीड़ित हैं।
प्रो. सुनीत सिंघी व डॉ. प्रतिभा सिंघी ने बताया कि बच्चों में मिर्गी रोग के तीन बड़े कारण हैं। पहला वंशानुगत है, अगर माता-पिता मिर्गी से पीड़ित रहे हैं तो बच्चों में भी यह बीमारी आने की संभावना रहती है।
दूसरा कारण है ब्रेन इन्फेक्शन वहीं तीसरा कारण बच्चे की डिलीवरी के समय सावधानी न बरते जाने के चलते उसे ऑक्सीजन की कम मात्रा मिलना हो सकती है। खून की कमी के कारण भी ब्रेन का ठीक से डेवलपमेंट न होने से मिर्गी होने की संभावना बढ़ जाती है। समय पर इलाज न मिले तो बच्चा मंदबुद्धि भी रह सकता है।
क्या रखें सावधानी
मिर्गी का दौरा आने पर बच्चे के हाथ-पैर चलने से रोके नहीं।
उसे सुरक्षित स्थान पर बाईं करवट लिटा दें।
दांत बंद होने पर उन्हें खोलने की कोशिश न करें
न ही बच्चे को कुछ सुंघाने की कोशिश करें।
सब्जी साफ-पानी से अच्छी तरह पकाएं।
घर में माहौल साफ सुथरा रखें, गंदे माहौल और सब्जियों से बच्चों को ब्रेन इंफेक्शन का खतरा हो सकता है।