ऐसा क्यों कर रहे होः अपनों पर रहम, गैरों पर सितम!
Source: Bhaskar News | Last Updated 02:35(09/02/12)
चंडीगढ़. प्रशासन और नगर निगम में डेपुटेशन पर लाए गए अफसरों के मामले में आला अफसर नगर प्रशासक का इशारा नहीं समझ पाते हैं। तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रशासक एक दिन की भी एक्सटेंशन नहीं देते, लेकिन बिजली विभाग अपने चहेतों पर मेहरबानी के लिए नियमों को ताक पर रख रहा है। यही नहीं एक बार डेपुटेशन का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अपने पेरेंट स्टेट लौट चुके अफसरों को वापस बुलाने के प्रयास किए जाते हैं।
सिर्फ हरियाणा से ही मंगाया पैनल
प्रशासन के बिजली विभाग में अपने चहेते अफसर को डेपुटेशन पर रखने के लिए सिर्फ हरियाणा से ही एक्सईएन का पैनल मंगवाया है। पंजाब से भी इसके लिए अफसरों के नाम मंगवाए जाने चाहिए।
हरियाणा से जो पैनल आया है उसमें दो अफसर वीके जैन और सुनील कुमार निगम में पहले भी डेपुटेशन पर रह चुके हैं। जैन तीन साल पहले वापस पेरेंट स्टेट हरियाणा चले गए थे, लेकिन सुनील कुमार की वापसी 21 जून 2011 को हरियाणा में हुई थी।
सुनील कुमार को एक्सटेंशन देने के लिए अफसरों ने पूरा जोर लगाया, लेकिन प्रशासक ने एक्सटेंशन देने से मना कर दिया था। ऐसे में प्रशासन को उन्हें वापस हरियाणा भेजना ही पड़ा। अब सुनील कुमार का नाम एक बार फिर पैनल में है।
प्रशासक नहीं मानते अप्रोच
प्रशासक शिवराज पाटिल पंजाब और हरियाणा से चंडीगढ़ प्रशासन और निगम के विभागों में डेपुटेशन पर आए अफसरों को तीन साल का कार्यकाल पूरा होने पर एक्सटेंशन नहीं देते हैं। चाहे अफसर की कितनी भी बड़ी अप्रोच क्यों न हो।
क्या है पॉलिसी
प्रशासन की अगस्त 1993 को तैयार की गई डेपुटेशन पॉलिसी के मुताबिक प्रशासन और निगम में एक बार अपने डेपुटेशन का कार्यकाल पूरा कर चुके कर्मचारी एवं अफसर को अपने पेरेंट स्टेट में कम से कम 5 साल गुजारने जरूरी हैं। उसके बाद ही अफसर प्रशासन में एक बार फिर डेपुटेशन पर आने के लिए आवेदन कर सकता है।
हरियाणा ने एक्सईएन के पैनल में सुनील का नाम भेजा है तो उनके पहले काम को देखकर सिफारिश की गई होगी। अभी पैनल नहीं देखा है। वैसे चंडीगढ़ में दोबारा डेपुटेशन पर लेने के लिए एक या दो साल का गैप होना जरूरी नहीं है।
- वीके सिंह, सेक्रेटरी, फाइनेंस एंड इंजीनियरिंग