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Home >> False Registration Of 1 Million Students In Punjab
पंजाब में 1 लाख छात्रों के रजिस्ट्रेशन फर्जी
सुखबीर सिंह बाजवा
| Aug 18, 2012, 05:35AM IST
नियमानुसार प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में 30, जबकि सेकेंडरी स्कूलों में 35 स्टूडेंट्स पर एक टीचर होना चाहिए। जिस स्कूल में बच्चों की संख्या ज्यादा होती है, वहां टीचर्स की संख्या बच्चों के अनुपात के अनुसार बढ़ जाती है। टीचर्स की संख्या पूरी करने के लिए अन्य स्कूलों से टीचर्स को वहां ट्रांसफर किया जाता है।
ऐसे में जिस स्कूल में बच्चों की संख्या ज्यादा दिखाई गई हो, वहां टीचर्स की संख्या बढ़ाने के लिए नेता और अफसर चहेते टीचर्स को एडजस्ट करा देते हैं। वहीं, बच्चों की संख्या ज्यादा दिखाए जाने के पीछे एक अन्य कारण टीचर्स की ट्रांसफर रोकना है। जिस स्कूल में बच्चों की संख्या कम होती है, वहां के टीचर्स को ज्यादा संख्या वाले स्कूलों में ट्रांसफर किया जाता है। ऐसे में कई स्कूलों के टीचर फर्जी रजिस्ट्रेशन कराकर ट्रांसफर से बचना चाहते हैं।
वो सब जो आप जानना चाहते हैं
स्कूलों में बच्चों की संख्या ज्यादा दिखा कर चहेते शिक्षकों का एडजस्ट करना। तबादलों से बचना, क्योंकि बच्चों की संख्या कम होने पर नियमानुसार शिक्षकों का तबादला तय है। बच्चों को बांटे जाने वाले मिड-डे-मील, मुफ्त में किताबें और वर्दी को लेकर जारी होने वाले फंड में गड़बड़ी करना।
1469 सीनियर सेकंडरी स्कूल हैं पंजाब में
1875 हाईस्कूल
6265 मिडिल स्कूल
1.5 लाख टीचर
26 लाख स्टूडेंट सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। (इनमें एक लाख फर्जी)
स्टूडेंट-टीचर रेशियो
प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में
30 स्टूडेंट्स/1 टीचर
सेकेंडरी स्कूलों में
35 स्टूडेंट्स/1 टीचर
ऐसे किया फर्जीवाड़ा
पंजाब के कई सरकारी स्कूलों में ऐसे बच्चों का रजिस्ट्रेशन है, जिनका नाम तो स्कूलों के रजिस्टरों में लिखा गया है, लेकिन वे स्कूल में नहीं हैं। ये नाम स्कूल में बच्चों की संख्या ज्यादा दिखाने के लिए दर्ज किए गए हैं।
इनमें कई उन बच्चों के नाम भी शामिल हैं, जो एक बार नाम लिखवाने के बाद स्कूल आते ही नहीं या वे एक क्लास पास कर अगली क्लास में चले जाते हैं, लेकिन उनका नाम पिछली क्लास में भी चलता रहता है। स्कूल छोड़ने वाले बच्चों के नाम भी राजिस्टरों से हटाए नहीं जाते।
ऐसे हुआ खुलासा
शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका ने बताया कि शिकायतों के आधार पर दो माह में पंजाब के ७क् फीसदी स्कूलों की जांच की गई। सभी स्कूलों में बच्चों की संख्या में १क् से 50 तक का अंतर पाया गया।
ये बच्चे एडमिशन के बाद दो-तीन माह से स्कूल नहीं आ रहे थे। करीब एक लाख बच्चों का रजिस्ट्रेशन फर्जी पाया गया। कई स्कूलों में टीचर्स ज्यादा और बच्चे कम पाए गए। स्कूलों के ज्यादातर टीचर आपस में साठगांठ कर एक-दूसरे को छुट्टी पर भेज देते थे और उनकी कक्षाएं खुद लगाते थे।
यह हो सकती है कार्रवाई
एक लाख फर्जी रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा चौंकाने वाला है। जिन शिक्षकों ने यह किया है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। अभी फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ऐसा सिर्फ तबादलों को लेकर किया गया था या कोई और मंशा थी।
- सिकंदर सिंह मलूका, शिक्षा मंत्री







