विज्ञापन
 
 
 
 

‘गोल्फ के मैदान पर कोई खा गया केले’

 
Source: मधुप यादव   |   Last Updated 03:49(09/02/12)
 
 
 
 

1998 में अर्जुन अवॉर्ड पाने वाले हरमीत कहलों का नाम गोल्फ के दर्जनों टूर्नामेंट में दर्ज है। इस खेल में वह नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर कई पदक जीत चुके हैं। वह प्रफेशनल गोल्फ टूअर ऑफ इंडिया के फॉर्मर चेयरमैन और चंडीगढ़ गोल्फ एकेडमी के डायरेक्टर भी रह चुके हैं। कुछ हफ्तों में दिल्ली में पीजीटी गोल्फ टूर्नामेंट होना है। इन दिनों वह इसी की प्रैक्टिस में जुटे हैं। हरमीत ने शेयर किए खेल और जिंदगी के कुछ किस्से:

टेनिस से आसान है गोल्फ

गोल्फ हाई लेवल की गेम है। फिजिकली भी और मेंटली भी। जो एक बार इसे खेल लेता है वो दूसरा गेम नहीं खेल सकता। यह टेनिस के मुकाबले आसान है, क्योंकि इसमें कमजोरी मैनेज हो जाती है। अगर टेनिस में ऑपोनेंट को कमजोरी पता लग जाए, तो वह वार करके कमर तोड़ देता है।

वो पठान याद आता है

पाकिस्तान के पठान खातिरदारी बहुत करते हैं। पठानों के साथ जितना भी वक्त गुजरा, मजेदार रहा। एक बार हॉन्गकॉन्ग एयरपोर्ट पर मुझे एक पठान कुली मिला जो कुली कम लेक्चरर ज्यादा लगता था। वो बोला, ‘साहब, जिंदगी में तीन चीजों का ऐतबार कभी मत करना मौसम, नौकरी और जनानी।’

एक और वाकया है। एक बार मैं बैग में दो केले लेकर गोल्फ खेलने गया। चार-पांच होल्स के बाद मैंने बैग में देखा तो केले वहां नहीं थे। मैंने पठान से पूछा। वह बोला, ‘भूख लगी थी साहब, सो मैं खा गया।’ मैंने कहा, ‘केले तो दो थे।’ वह बोला, ‘एक मैंने खा लिया और दूसरा अपने कुली भाई को खिला दिया। वो भी पाकिस्तान से है ना।’ यह सुनकर मैं बहुत देर तक हंसता रहा।

मिसाल हैं जीव मिल्खा सिंह

पंजाबियों के लिए गोल्फ एडवांटेज का काम करता है, जैसा जीव मिल्खा के लिए किया। मैं और जीव साथ में बड़े हुए हैं। उन्हें यह खेल विरासत में मिला, अब वो इसकी मिसाल बन चुके हैं। उनकी खेलने की टेक्नीक आज भी पहले की तरह ही है। उन्होंने जो भी गोल्फ के लिए किया, उसका जवाब नहीं। इसलिए लोग उन्हें इतना प्यार करते हैं।

इस दौर की जिंदगी

अब लाइफ बहुत फास्ट हो गई है। फोन और टीवी की वजह से ध्यान भटकने लगा है। युवाओं में सोशल सेंस बहुत कम है। वे टाइम की कद्र नहीं करते। उन्हें समझना चाहिए कि बगैर मेहनत के कुछ नहीं हो सकता।

रुटीन में शामिल है

डेली सुबह उठते ही चाय पी कर जिम जाता हूं। जॉगिंग व स्क्वैश का भी शौकीन हूं। जब भी टाइम मिलता है अखबार पढ़ता हूं। जितने भी लोगों को मैं जानता हूं, उनको अखबार का काफी क्रेज है।

जब सुबह 5 बजे खिड़की टूट जाए

वो सुबह का नजारा आज भी डरा जाता है जब मेरी खिड़की का कांच टूटा था। तकरीबन सुबह के चार बजे थे, घर के बाहर कुत्ता जोर-जोर से भौंक रहा था। उसे भगाने के लिए मैंने पत्थर फेंका। कुत्ता तो भाग गया, फिर अचानक 5 बजे मेरी खिड़की का कांच धड़ाम से टूटा। मैंने बाहर सब जगह देखा, मगर कोई नहीं था। न ही बाहर कोई पत्थर था और न ही कोई इंसान। हैरान था, क्योंकि जोर की हवा के झौंके से कांच टूटा था। बाद में समझ आया कि जिनके घर शीशे के होते हैं वो दूसरों के घरों पर में पत्थर नहीं फेंका करते।

 

हरमीत कहलों, गोल्फर

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
आपके विचार

 
 
कोड :
1 + 2

 
 
विज्ञापन
 

बड़ी खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

रोचक खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बॉलीवुड

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जीवन मंत्र

 
 
 
 
 
 
 
 
 

क्रिकेट

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बिज़नेस

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जोक्स

 
 
 
 
 
 
 
 
 

पसंदीदा खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

फोटोगैलरी

Most Viewed

Victoria’s Secret picks sexiest women
Jennifer Flaunts Her Killer Curves
Just Added

Keeping it hot
Tribute to Rajiv Gandhi
 
 
 
विज्ञापन
 
 
| Email  Print Comment
| Email  Print Comment