मुजरिम पर मेहरबानी, हाईकोर्ट के आदेश नजरअंदाज
Source: संजीव महाजन | Last Updated 02:29(09/02/12)
चंडीगढ़. पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट सब इंस्पेक्टर रविंदर सिंह को कातिल ठहराकर उम्रकैद की सजा सुना चुका है। उसी एसआई रविंदर सिंह की थानेदारी पुलिस के एक आला अफसर के रहमोकरम पर 2 नवंबर से बरकरार है। हाईकोर्ट के आदेशों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
रविंदर पर अपनी पत्नी करनजीत के कत्ल का आरोप था। नवंबर 2011 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस जसबीर सिंह व जस्टिस सबीना की खंडपीठ ने रविंदर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। फिर भी रविंदर लगातार थाना इंडस्ट्रियल एरिया में थानेदारी कर रहा है। पुलिस भरपूर मौका दे रही है कि थानेदार सुप्रीम कोर्ट में जाकर हाईकोर्ट के आदेश के विपरीत स्टे हासिल कर ले।
मेहरबानी किसकी
चर्चा है कि कत्ल के दोषी रविंदर सिंह पर पुलिस की मेहरबानी के पीछे एक ऐसे शख्स की पैरवी है जो पुलिस अफसरों के साथ उठता-बैठता है। शायद यही कारण है कि पहले 1 माह तक पुलिस विभाग कहती रही कि हाईकोर्ट की जजम को फोर्स से निकालने की फाइल एसएसपी नौनिहाल सिंह के ऑफिस में है। इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया है। थाना इंडस्ट्रियल एरिया के रिकॉर्ड के मुताबिक रविंदर इन दिनों एक केस की जांच में शहर से बाहर गया हुआ है।
क्या है केस
1 मार्च 1998 को दायर केस के मुताबिक रविंदर पर सर्विस रिवॉल्वर से पत्नी की हत्या का केस दर्ज किया गया था। 2 अप्रैल 2001 को जिला अदालत ने इस मामले में स ंदेह का लाभ देते हुए रविंदर को दोषमुक्त कर दिया था।
अदालत ने फैसले में कहा था कि 22 गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद आरोप साबित नहीं हो रहा है। करनजीत के घरवालों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। हाईकोर्ट ने रविंदर की इस दलील को विश्वसनीय नहीं माना कि घटना के दिन जब वह ड्यूटी पर थे तो उनकी सर्विस रिवॉल्वर घर पर रह गई थी। रविंदर की पत्नी करनजीत के घरवालों ने आरोप लगाया था कि अदालत में पुलिस ने सही ढंग से पैरवी नहीं की।
मुझे इस बारे में जानकारी ही नहीं है। अगर फाइल मेरे पास है तो उस पर जो कानूनी कार्रवाई बनती होगी, वह की जाएगी।
- नौनिहाल सिंह,एसएसपी यूटी