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बगैर पेट्रोल कैसे हो पेट्रोलिंग, 60 में से सिर्फ 11 पीसीआर जिप्सी ड्यूटी पर

 
Source: संजीव महाजन   |   Last Updated 02:13(07/02/12)
 
 
 
 
चंडीगढ़. पीसीआर की 60 गाड़ियां और पेट्रोलिंग पर सिर्फ 11, बाकी वुमन सेल की बेसमेंट में खड़ी हैं। वजह है इनकी पेट्रोल की टंकी खाली होना। सोमवार को शहर में ऐसा ही हुआ। ये किसी लिहाज से शहर की सुरक्षा व्यवस्था को बरकरार रखने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे गलती है पुलिस और प्रशासन के अफसरों की, जिन्होंने मनमर्जी से पहले वाहन खरीदे और अब पेट्रोल का कोटा ही कम पड़ गया है।

अब पुलिस पेट्रोल मांग रही है और फाइनेंस सेक्रेटरी के ऑफिस में फाइल फंसी है। पीसीआर की बेहाली की जानकारी होने के बावजूद सोमवार को लाट साहब के साथ लॉ एंड ऑर्डर की मीटिंग में किसी अफसर ने पेट्रोल की कमी का मुद्दा उठाने की हिम्मत नहीं दिखाई।

पहले जिप्सी खरीदी, फिर मंजूरी मांगी

बीपीआरएनडी के कायदों की पुलिस अफसरों द्वारा की गई अनदेखी का ही कारण है कि आज पुलिस के पास पेट्रोल ही नहीं है। बीपीआरएनडी की सिफारिश थी कि शहर में 39 पीसीआर जिप्सियां चलाई जाएं। अफसरों ने प्रशासन की मंजूरी लेकर पीसीआर में एकाएक 60 जिप्सियां कर दीं। 21 जिप्सियां ज्यादा खरीदने के बाद पीसीआर की स्ट्रेंथ बढ़ाने के लिए एमएचए को लिखा गया, लेकिन मंजूरी नहीं मिली। प्रशासन के रहमोकरम पर 60 जिप्सियां चलती रहीं। अब पेट्रोल कम पड़ने लगा है तो पीसीआर की जिप्सियां बेकार खड़ी हैं।

तो फिर फोर्स कहां गई?

दो दिन से पीसीआर की अधिकांश गाड़ियां बिना पेट्रोल के खड़ी हैं। जबकि जिस कांस्टेबल गुरदयाल सिंह ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या की, उनके साथ जिप्सी में दो ही महिला कांस्टेबल थीं। गुरदयाल से ड्राइवर और इंचार्ज की दोहरी ड्यूटी ली जा रही थी।

1. अब सवाल यह है कि जब ज्यादातर जिप्सियां खड़ी हैं, तो उन पर तैनात होने वाले जवान आखिर गए कहां?
2. उन्हें किस डच्यूटी पर लगाया गया?
3. फोर्स फ्री हुई, तो उनकी तैनाती उन जिप्सियों में क्यों नहीं की गई, जिनमें फोर्स की कमी थी?

और यह रहा जवाब

डीएसपी रोशनलाल के मुताबिक पीसीआर से फ्री हुए कर्मचारियों से सोमवार से नाके लगवाए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो एकाएक पीसीआर में अब रोस्टर तैयार करवाने और अफसरों की मर्जी से हर माह रोस्टर बदलने की मांग उठने लगी है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और पुलिस कारगुजारी भी सही हो जाएगी। रोस्टर सिस्टम ट्रैफिक पुलिस में नियमित तौर पर लागू है।


अब तो उधार में भी नहीं मिल रहा पेट्रोल

पीसीआर और चंडीगढ़ पुलिस की कई जिप्सियों में इस साल पूरे फाइनेंशियल ईयर में दूसरी बार पेट्रोल खत्म हो गया है। इससे पहले नवंबर में भी पेट्रोल खत्म हुआ था। एक फाइनेंशियल ईयर में साढ़े 3 करोड़ के पेट्रोल का बजट पास हुआ था। नवंबर तक यह पेट्रोल खत्म हो गया। इसके बाद पुलिस के सेक्टर 33 पेट्रोल पंप से अब तक करीब 25 लाख रुपये का पेट्रोल उधार लिया जा चुका है। सूत्रों की मानें तो अब पुलिस की इस उधारी को भी बंद कर दिया गया है। टेंपरेरी तौर पर सोमवार रात अफसरों के दबाव में एक टैंकर पेट्रोल जारी किया गया, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पीसीआर की जिप्सियों में पेट्रोल ही नहीं है। सुबह 60 में से सिर्फ 20 गाड़ियां चली थीं, जबकि दोपहर को 9 गाड़ियों का पेट्रोल खत्म हो गया। अब मात्र 11 गाड़ियां ही पेट्रोलिंग कर रही हैं।

रोशनलाल, डीएसपी पीसीआर
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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