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इंडस्ट्री बताए कैसे युवा चाहिए?

 
Source: इन्द्रप्रीत सिंह   |   Last Updated 02:44(10/02/12)
 
 
 
 
चंडीगढ़. बठिंडा के पास 20 हजार करोड़ रुपए के निवेश वाली गुरु गोबिंद सिंह ऑयल रिफाइनरी ने अपना काम शुरू कर दिया है लेकिन इसमें काम करने वाले इंजीनियर पंजाब से नहीं, बल्कि दक्षिण भारत से बुलाए गए हैं। इसी रिफाइनरी के साथ पांच हजार करोड़ रुपए की पेट्रो इंडस्ट्री भी लगनी है। इसमें भी कुछ को छोड़कर शेष कामगार अन्य राज्यों से बुलाने पड़ेंगे।

बात साफ है कि इंडस्ट्री को जिस प्रकार की स्किल्ड लेबर की जरूरत है, वैसी यहां के इंजीनियरिंग कॉलेज, बहुतकनीकी कॉलेज और आईटीआई नहीं दे पा रहे हैं। इंडस्ट्री और तकनीकी कॉलेजों के बीच बहुत बड़ा गैप है। इस गैप को पूरा करने के लिए पंजाब सरकार 11 फरवरी को कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज का सहयोग लेने जा रही है। यानी सरकार इंडस्ट्री से पूछेगी कि उसे किस प्रकार के युवा चाहिए।

यदि ऐसे युवाओं को तैयार करने के लिए इंजीनियरिंग कॉलेजों, आईटीआई आदि में सिलेबस को बदलने की स्थिति आती है तो इस पर विचार किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इस समय पंजाब में लगभग 47 लाख युवा बेरोजगार हैं।

नई तकनीकी शिक्षा और इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग पॉलिसी

पंजाब सरकार जल्द ही नई तकनीकी शिक्षा और इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग पॉलिसी लाने जा रही है। विभाग की ओर से की गई स्टडी के मुताबिक, आईटीआई में लड़कियों का दाखिला काफी कम होता है। इसे किस तरीके से बढ़ाया जाए इस पर भी विचार हो रहा है। इसके अलावा फीस एक ऐसा विषय है जिसने मध्यम और गरीब वर्ग को तकनीकी शिक्षा से दूर कर दिया है।

इसके लिए पंजाब हायर एजुकेशन फाइनांस एंड लोन सेल स्थापित किया जाएगा जिससे मेधावी विद्यार्थियों की मदद की जाएगी। कॉलेजों की मैनेजमेंट कमेटियों और सरकारी सहयोग से इस गैप को दूर करके ऐसे वर्ग को तकनीकी शिक्षा में लाने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा तैयार होने वाले युवाओं के प्लेसमेंट की ओर विशेष ध्यान देना भी नीति का हिस्सा होगा।

फैकल्टी भी बना बड़ा सवाल

दूसरा बड़ा सवाल इन इंजीनियरिंग कॉलेजों और तकनीकी कॉलेजों में पढ़ाने वाले अध्यापकों का है। नई नीति के अनुसार, अब फैकल्टी को कॉलेजों में लेने से पहले उनका योग्यता टेस्ट होगा। इसके अलावा उन्हें हर साल नए कोर्सो का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यदि अध्यापक चाहें तो अध्यापन के साथ-साथ वह अपनी योग्यता को बढ़ाने के लिए डिस्टेंस एजुकेशन के तहत पढ़ाई भी कर सकेंगे।

‘अर्न वाइल यू लर्न’ नाम से एक योजना

दसवीं के बाद 11वीं-12वीं में सर्टिफिकेट कोर्स करवाना भी नीति में शामिल किया गया है। इसके अलावा ‘अर्न वाइल यू लर्न’ नाम से एक योजना आएगी जिसके तहत विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ काम करने की सुविधा होगी। इससे वे पढ़ाई का खर्च भी उठा पाएंगे।

ड्राफ्ट पॉलिसी तैयार की है : सुरेश

अभी केवल ड्राफ्ट पॉलिसी तैयार की है। सिलेबस बदलना है कि नहीं यह तो इंडस्ट्री ही बताएगी। इसीलिए तो उन्हें बुलाया गया है। फेरबदल की जरूरत हुई तो पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी को इसे बदलने की सिफारिश की जाएगी।

सुरेश कुमार, प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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