अब चंडीगढ़ में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी टैक्स की तैयारी
Source: राजबीर सिंह राणा | Last Updated 08:18(08/02/12)
चंडीगढ़. केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय के दबाव में प्रशासन को शहर में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी टैक्स लागू करने के लिए झुकना पड़ गया है। इसे लागू करने का एजेंडा निगम हाउस की 16 फरवरी को होने वाले मीटिंग में लाया जा रह है।
इसका एजेंडा बनाने के लिए निगम कमिश्नर प्रेरणा पुरी ने मंगलवार को ही निगम के सभी अधिकारियों को छुट्टी के दिन भी बुला लिया। उनके साथ मीटिंग की कि कितना रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी टैक्स लगाया जाए। हालांकि फिलहाल इस पर सहमति नहीं बन पाई है।
रिफॉर्म्स जो लागू करने हैं
केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने जेएनएनयूआरएम के तहत शहर में संबंधित प्रोजेक्ट के लिए फंड जारी करने से पहले रिफॉर्म्स लागू करने की शर्त रखी थी। इनमें रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी टैक्स, वॉटर टैरिफ बढ़ाने, ई-गवर्नेंस, पब्लिक डिसक्लोजर सिस्टम, कम्युनिटी पार्टिसिपेशन, स्टैंप ड्यूटी का रैशनलाइजेशन, शिफ्ट टु अकाउंट्स बेस डबल एंट्री, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप बढ़ाने, बिल्डिंगों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना मुख्य हैं। नगर निगम और प्रशासन ने रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी टैक्स को छोड़कर बाकी शर्तो को लागू किया है। मगर राजनीतिक कारणों के चलते रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी टैक्स का मामला छह साल से सिरे नहीं चढ़ सका।
कितना हो सकता है टैक्स
शहर में एक लाख से ज्यादा मकान हैं। कमर्शियल प्रॉपर्टी से प्रशासन को करीब 20 करोड़ रुपये की सालाना आय होती है। रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी से भी इतनी ही आमदनी जुटाने का लक्ष्य हो सकता है। इस हिसाब से हर मकान मालिक को सालाना 2000 रुपये चुकाने पड़ सकते हैं। हालांकि टैक्स कितना होगा यह हाउस की मीटिंग में ही तय किया जाएगा।
555 करोड़ के प्रोजेक्ट
(जेएनएनयूआरएम के तहत कितनी ग्रांट)
65 करोड़ ऑटोमेटेड वॉटर सप्लाई और टर्शरी वॉटर पार्को तक पहुंचाने के लिए।
170 करोड़ कजौली वाटर वर्क्स से पांचवे और छठे फेज की लाइन के लिए।
120 करोड़ ईंटों की पुरानी सीवर लाइन बदलने के लिए।
100 करोड़ हाउसिंग बोर्ड ने लिए पुनर्वास योजना के लिए।
क्या है मजबूरी
इसे लागू करना प्रशासन की मजबूरी है, क्योंकि शहर में जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्युअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत अरबों के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। प्रशासन छह साल में इस रिफॉर्म को लागू नहीं कर सका है। अब मंत्रालय की चेतावनी के आगे प्रशासन ने रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी टैक्स लागू करने के लिए निगम को एजेंडा बनाने के निर्देश दे डाले हैं। एक तरह से प्रशासन ने गेंद नगर निगम के पाले में फेंक दी है।
न लागू किया तो..
जेएनएनयूआरएम रिफॉर्म्स के तहत रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी टैक्स लागू नहीं किया गया तो निगम और प्रशासन को जेएनएनयूआरएम के तहत चल रहे प्रोजेक्ट के लिए मिलने वाले फंड की किस्त बंद हो सकती है।
और यह थी शर्त
इन प्रोजेक्ट को मंजूरी देते समय केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने शर्तें लगाई गई थीं कि दो साल के भीतर रिफॉर्म्स लागू करने होंगे। हालांकि प्रशासन ने अब तक रिफॉर्म्स को पूरी तरह लागू नहीं किया है।