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रुचिका छेड़छाड़ केस: हाईकोर्ट ने पूछा.. क्या इस याचिका पर सुनवाई जारी रखें
भास्कर न्यूज | May 04, 2012, 03:25AM IST

वीरवार को जस्टिस एसएस सारों व जस्टिस एनके सांघी की खंडपीठ ने कहा कि याचिका दायर करने वाली संस्था रजिस्टर्ड नहीं है। ऐसे में संस्था की तरफ से दाखिल जनहित याचिका पर क्या सुनवाई जारी रखी जा सकती है।
यह याचिका स्वयंसेवी संस्था वल्र्ड ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन काउंसिल के चेयरमैन वकील रंजन लखनपाल की तरफ से दाखिल की गई है। इस पर राठौर की तरफ से उनकी पत्नी वकील आभा राठौर ने आपत्ति दर्ज कर कहा था कि संस्था को याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है। खंडपीठ ने लखनपाल से पूछा है कि याचिका किस आधार पर दायर की गई और उन्हें इस मामले में याचिका दायर करने का क्या अधिकार है। इस पर लखनपाल ने कहा कि संस्था की तरफ से हाईकोर्ट में कुल 42 याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। इनमें पंजाब की जेलों में बंद पाकिस्तानी कैदियों की रिहाई का मामला सबसे प्रमुख रहा।
क्या है मामला
वल्र्ड ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन काउंसिल के चेयरमैन वकील रंजन लखनपाल की तरफ से दाखिल जनहित याचिका में इस सारे मामले की नए सिरे से जांच कराए जाने की मांग की गई है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि आपराधिक मामले के विचाराधीन रहते हुए राठौर को पदोन्नति कैसे दी गई। यह केस 2010 से हाईकोर्ट में विचाराधीन है। केस से जुड़ा तमाम रिकॉर्ड भी अदालत में पेश किया जा चुका है। हाईकोर्ट के छह जज भी इस केस पर सुनवाई करने से इंकार कर चुके हैं।







