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अफसाना चंडीगढ़ का, सात साल, छह मुद्दे, रिजल्ट जीरो

बरींद्र सिंह रावत | Jul 08, 2012, 04:53AM IST
 
 

चंडीगढ़. नॉर्दर्न जोनल काउंसिल की मीटिंग चंडीगढ़ के लिए मजाक बनकर रह गई है। यह मीटिंग सात साल पहले शिमला में हो या फिर अब चंडीगढ़ में, इस शहर को हमेशा ही नजरअंदाज किया जाता रहा। 25 अक्टूबर 2005 को शिमला में हुई मीटिंग को ही लीजिए।

तब शिवराज पाटिल के सामने पंजाब के गवर्नर और चंडीगढ़ के प्रशासक जनरल एसएफ रोड्रिग्स ने शहर से जुड़े जिन मुद्दों को उठाया था, वे मुद्दे आज तक अमल में नहीं लाए जा सके। पाटिल ढाई साल से शहर के प्रशासक हैं, इसके बावजूद न शहर में बाईपास बना, न पेरीफेरी की सही डेवलपमेंट हुई। ट्राईसिटी के डेवलपमेंट का नया मास्टर प्लान तक नहीं बन पाया।

और इस बार पंजाब की राजधानी में हो रही इस मीटिंग में जम्मू-कश्मीर सरकार की एक बिल्डिंग खाली करवाने के अलावा शहर के मुद्दे ही नहीं हैं। चंडीगढ़ पर दावा, मुद्दों पर खामोशी: इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृहमंत्री करते हैं। कमेटी में सात राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हैं।

इस बार की बैठक में भी चंडीगढ़ के प्रशासक के साथ पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। दोनों ही राज्य बतौर राजधानी चंडीगढ़ पर बराबर का हक जताते हैं। सिटी ब्यूटीफुल में अपने राज्यों के अफसरों की तैनाती के लिए गृहमंत्री को चिट्ठी लिखते हैं, लेकिन चंडीगढ़ के मुद्दों पर खामोशी ओढ़ लेते हैं।
 
 
 

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