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Home >> No Stretchers For Patients, Doctors Have Hit Locks
मरीजों के लिए स्ट्रेचर नहीं, डॉक्टरों को लैपटॉप
सत्येन ओझा
| Apr 18, 2012, 03:10AM IST

मरीजों की देखभाल का जिम्मा रखने वाला नर्सिग स्टाफ भले ही 703 की जगह सिर्फ 298 हो, लेकिन बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ी करने के लिए प्रशासन के पास धन है और समय भी। ये नजारा है चंडीगढ़ के जीएमसीएच-32 का। सुविधाओं के अभाव में यहां आने वाले मरीजों का बुरा हाल है। भास्कर टीम मंगलवार सुबह जीएमसीएच-32 के ब्लड कलेक्शन सेंटर के पास पहुंची तो हालात चौंकाने वाले थे। यूरिन सैंपल देने और फीस जमा कराने वाले मरीजों की लाइनें लंबी थी। हैरान करने वाली बात सह रही कि यूरिन टेस्ट कलेक्शन सेंटर के पास जेंट्स और लेडीज दोनों टायलेटों में ताले लगे थे। मरीज परेशान थे कि यूरिन सैंपल देने को वे जाएं कहां।
डस्टबिन का काम गत्तों के डिब्बों से
अस्पताल में मेडिकल वेस्ट के लिए केन्द्र सरकार के निर्देशानुसार तीन अलग-अलग रंगों लाल, पीली, नीले डस्टबिन रखने होते हैं। इसमें सर्जरी वेस्ट अलग-अलग डस्टबिन में डाला जाता है। मेडिकल कॉलेज में गत्तों के डिब्बों में ही मेडिकल वेस्ट भर कर काम चलाया जा रहा।
125 लैपटॉप डॉक्टरों को गिफ्ट
इस साल वित्तीय साल के अंत में मेडिकल इक्यूपमेंट के फंड में जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 में काफी राशि थी। सूत्रों का कहना है कि पैसा लैप्स न हो, जीएमसीएच-32 प्रशासन ने जीएमएसएच-16 में बची राशि भी खुद लेकर खर्च का नया तरीका खोज लिया। 125 लैपटॉप और 70 कंप्यूटर डॉक्टरों को गिफ्ट दे दिए गए। निचले स्टाफ को भी चुप कराना था, लिहाजा ऑनरेरियम के नाम पर 3 लाख रुपये उन्हें भी बांट दिए गए। अधिकारियों का जवाब है कि जिन कर्मियों ने अतिरिक्त समय में अस्पताल को सेवाएं दी हैं, यह राशि उन्हें दी गई है।
रात को कटती है जेब
दिन के वक्त जीएमसीएच-32 में मरीजों को तमाम समस्याओं से जूझना पड़ता है। सुबह स्ट्रैचर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता ही है। रात में हालत और खराब हो जाते हैं। रिकॉर्ड में यहां बहुत कुछ फ्री है, पर रात में घायलों को मरहम-पट्टी के भी पैसे चुकाने पड़ते हैं।
मैं अपनी मां के इलाज के लिए जीएमसीएच-32 गया था लेकिन यहां तो लगा ये हॉस्पिटल ही बीमार है। ठीक हालत में आने वालों को भी इन्फेक्शन का खतरा रहता है, सफाई का कोई ध्यान नहीं है। टॉयलेट में ताले लगे हैं।
-अरुण सूद, पार्षद
सैंपल देने के लिए हॉस्पिटल में एक घंटे लाइन में लगना पड़ा। गंदगी का भी बुरा हॉल है। टॉयलेट में ताले लगे देख मुझे बड़ा अचम्भा हुआ। स्ट्रेचर टूटे पड़े हैं।
सुनील सचदेवा, एकाउंट्स अफसर, हरियाणा सरकार







