उम्र 10 साल, एक अजीबो-गरीब सपना और दुनिया की नजरों में चढ़ा ये मासूम!

बच्चों की कहानी पर आधारित यह किताब इंग्लिश में लिखी गई है। वैसे आर्यन की मातृ भाषा हिंदी है। इस किताब को पंजाब के प्रसिद्ध पब्लिशर यूनिस्टार बुक्स ने प्रकाशित किया है। दिल्ली पब्लिक स्कूल के इस छात्र का दावा है कि वह विश्व में सबसे छोटी उम्र का लेखक है। इससे पहले रोनन चटर्जी ने 11 वर्षीय की उम्र में किताब लिखी थी।
100 से ज्यादा किताबें पढ़ चुका
आर्यन ने बताया कि उसे एक रात अजीबो-गरीब सपना आया। दूसरी रात वही सपना कंटीन्यू हो गया। सुबह उठा तो वह हैरान था। उसने इस सपने को कागज पर उकेर दिया। जब उसने इसे अपने पापा दिनेश भारद्वाज को दिखाया तो वह भी इतनी अच्छी शब्दावली में लिखी कहानी देखकर हैरान रह गए। उन्होंने पब्लिशर को इसे दिखाया तो उसने प्रकाशित करने की हामी भर दी।
आर्यन का कहना है कि अगर कोई कुछ करना चाहता है तो उम्र आड़े नहीं आतीं। मां सोनिया भारद्वाज का कहना है तीन साल में पहली बार उसने फैंसी ड्रैस मुकाबले में भाग लिया और फस्र्ट आया था। आर्यन कवि दरबार व मुशायरों में भी भाग ले चुका है। एक समागम में कविता बोलने पर मुख्यमंत्री बादल ने उसे 2000 रुपये इनाम दिया था। छह साल से ही उसे रामायण जुबानी याद है। अब तक वह 100 से ज्यादा किताबें पढ़ चुका है।
आर्यन ने किया हैरान : पब्लिशर
यूनिस्टार बुक्स के एमडी रोहित जैन का कहना है कि यह पहली बार है जब उन्होंने इतनी कम आयु के बच्चे की कोई किताब छापी है। इस उम्र में बड़ी बातें करना हैरान करता है। ज्ञान पीठ अवार्डी प्रो. गुरदयाल सिंह ने भी लिखा है कि ‘क्रीचरोनिया’ को आर्यन की प्रतिभा व कल्पना का चमत्कार ही कहा जा सकता है। कहानी का नायक रिडथ कैसे मानवी कदरों कीमतों को पुन: सृजन करता है। .






