चुनावी गफ्फों के चलते फंसे 1600 करोड़ रुपए के बिल
Source: इन्द्रप्रीत सिंह | Last Updated 04:21(07/02/12)
चंडीगढ़. चुनाव से पहले कर्मचारियों को पांचवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करके दिए गए चुनावी गफ्फों ने 1600 करोड़ रुपए का बिल खजाने में फंसा दिए हैं। हालत यह है कि छोटे-छोटे मेडिकल बिल हों या फिर विकास कार्यो के बिल, सभी को पास करवाने में दिक्कतें आ रही हैं।
उधर 2010-11 की आमदनी के मुकाबले 2011-12 के लिए प्रोजेक्ट की गई आमदनी में आई कमी ने कंगाली में आटा और गीला कर दिया है। अगले दो महीनों (फरवरी और मार्च) में आमदनी बढ़ने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
क्या क्या दी थी चुनावी सौगातें
अकाली भाजपा सरकार ने चुनाव जीतने के लिए कर्मचारी वर्ग को खुश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सभी वर्गों के वेतनमान जहां रिवाइज किए गए वहीं अध्यापक वर्ग और पुलिस विभाग को उच्च स्केल,भत्तों (यात्रा, मोबाइल,एलटीसी)आदि में वृद्धि की गई। कई वर्गों को स्पेशल पे ग्रेड भी मिले। अकेले शिक्षा विभाग के ग्रेड बढ़ने से 300 करोड़, पुलिस के ग्रेड बढ़ने से 50 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ खजाने पर बढ़ा।
इसके अलावा कर्मचारियों को डीए 51 फीसदी से 58 फीसदी करने पर 700 करोड़ रुपए का बोझ पड़ा। वित्त विभाग का आकलन है कि सबसे बड़ा बोझ कर्मचारियों की फुल पेंशन के लिए आयु 33 साल से कम करके 25 साल करने से पड़ेगा। वैसे सभी चुनावी गफ्फों का वित्त विभाग ने आकलन 2000 करोड़ किया है। ये एक दिसंबर से लागू हो गई हैं लेकिन नई बनने वाली सरकार के लिए मुश्किलें ज्यादा होंगी।
आमदनी अपेक्षा से ज्यादा घटी
वित्त विभाग ने अपने बजट में वैट से आमदनी 11800 करोड़ रुपए लगाई थी लेकिन दिसंबर तक यह 8500 करोड़ आमदनी हुई है जो पिछले साल के मुकाबले आठ फीसदी कम है। स्टांप डच्यूटी से होने वाली आमदनी में भी इतनी ही कमी आई है।
क्या कहते हैं मुख्य सचिव
मुख्य सचिव एस.सी.अग्रवाल ने संपर्क करने पर माना कि 1600 करोड़ रुपए के बिल लंबित हो गए हैं। उन्होंने कहा, उन्होंने प्रमुख सचिव वित्त से जल्द से जल्द इन बिलों को यथासंभव कोशिश करके पास करने को कहा है।