प्रेरणा बन लौटेंगे
पंजाब के तेज गेंदबाज वीआरवी सिंह का कहना है कि युवी एक फाइटर हैं। वे सबके लिए प्रेरणा बन कर लौटेंगे। युवी ने हर बार चोटों से उबरकर वापसी की है, इस बार भी करेंगे।
सेमिनोमा से हैं पीड़ित
सेमिनोमा एक तरह का जर्म्स सेल ट्यूमर है। यह आमतौर पर पुरुषों के गुप्तांगों में होता है। युवराज के फेफड़ों के बीच में सेमिनोमा (कैंसर की गांठ) है। इस वजह से इसे फेफड़ों का कैंसर नहीं कहा जा सकता। शुरुआती खबरों में इसे फेफड़ों का कैंसर बताया गया था। सेमिनोमा नामक ट्यूमर गोल्फ बॉल के आकार तक विकसित होता है। इसे आम तौर पर दुर्लभ माना जाता है। मरीज को तीन-चार स्तर की कीमोथेरेपी दी जाती है। फिर भी शरीर में कैंसर सेल्स बचते हैं तो सर्जरी होती है।
मई के बाद मैदान में वापसी!
युवी के डॉक्टर रहे नीतिश रोहतकी का दावा है कि युवराज मई तक पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे। उसके बाद टीम में आ सकते हैं।
बीसीसीआई शुरू करेगा बुलेटिन
बीसीसीआई ने कहा है कि युवी के स्वास्थ्य की ताजा जानकारी के लिए नियमित बुलेटिन जारी किया जाएगा।
...तो यह हाल न होता
युवराज के पिता और पूर्व क्रिकेटर योगराज सिंह का मानना है कि इलाज में देरी हुई। उन्होंने कहा, दो साल पहले मोहाली में टी-20 मैच में युवराज बुरी तरह खांस रहे थे। उस समय मैंने उनसे पूरी तरह चेक-अप कराने को कहा था। युवी का जवाब था, ‘मैं बच्चा नहीं हूं।’ यदि उस समय जांच कराते तो यह हालात नहीं बनते। यह कहते हुए योगराज सिंह की आंखों में आंसू आ गए।
इन्होंने दी है कैंसर को मात
लांस आर्मस्ट्रांग, पूर्व अमेरिकी साइक्लिस्ट टफ ट्रेनिंग : 1996 में इन्हें टेस्टिकुलर कैंसर हो गया। डाक्र्ट्स की टीम ने सर्जरी और कीमोथेरेपी की। ऑर्मस्ट्रांग ने प्रोफेशनल साइक्लिस्ट बॉब रोल के साथ 8 घंटे का कठिन अभ्यास किया और करियर में वापसी की।
प्रेरक वाक्य :विजेता हारा नहीं करते मैदान में लौटे : 1999 में वापसी का जज्बा काम आया और टूर डे फ्रांस रेस जीतकर शानदार शुरुआत की। 2005 तक इस रेस में उन्हें कोई चुनौती नहीं दे सका। युवराज सिंह लांस आर्मस्ट्रांग को प्रेरणास्त्रोत मानते हैं और आजकल उन पर लिखी किताबें पढ़ रहे हैं। अमेरिका में इलाज के दौरान वे भी हल्की जॉगिंग कर खुद को फिट रखने की कोशिश कर रहे हैं।
एरिक एबीडाल, फ्रांसीसी फुटबॉलर दो माह में लौटे मैदान पर :फ्रांस के फुटबॉलर एरिक को 15 मार्च 2011 को पता चला कि लीवर में कैंसर है। आरंभिक स्टेज में था, इसलिए तेज रिकवरी हुई। परिवार-दोस्तों के सपोर्ट से दो माह बाद मैदान में लौट आए। प्रेरक वाक्य : नामुमकिन कुछ नहीं, कर दिखाना है चैंपियंस लीग में दिलाई जीत : मैदान पर लौटते ही चैंपियंस लीग फाइनल में अपने क्लब बार्सीलोना को जिताने में निभाई अहम भूमिका।
डेव कलाघन, पूर्व द. अफ्रीकी क्रिकेटर समय पर हुई पहचान : 1991 में 27 साल की उम्र में डेव को टेस्टिकुलर कैंसर का शुरुआत में ही पता चल गया। ट्रीटमेंट के साथ प्रैक्टिस में जुटे। एक साल के बाद मैदान में लौट आए। प्रेरक वाक्य : हौसला बुलंद और लड़ने का हो जज्बा, तो जीत मिलेगी ही करियर का बेस्ट नॉक : वापसी के कुछ समय बाद ‘94 में न्यूजीलैंड के खिलाफ मंडेला ट्रॉफी में 169 रन की करियर बेस्ट पारी खेली।
ज्यॉफ्री बॉयकॉट, पूर्व ब्रिटिश क्रिकेटर पॉजिटिव सोच :बेबाक राय के लिए पहचान बना चुके इंग्लैंड के पूर्व बल्लेबाज व कमेंटेटर ज्यॉफ्री बॉयकॉट को 10 साल पहले थ्रोट कैंसर हुआ। ट्रीटमेंट और पत्नी रशेल के सहयोग से वे जीत गए।
सकारात्मक रहने की सलाह :ज्यॉफ्री की बेबाक कमेंट्री जारी है। वे युवी को सलाह देते है कि हर हाल में उन्हें सकारात्मक सोच रखनी होगी।
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