मंत्रच्चारण के बीच युवराज सिंह का नाम आया और अरदास कर रहे शख्स के हाथ साईं बाबा की तरफ झुक गए। ये शख्स हैं युवराज सिंह के मैनेजर राजकुमार कपूर। कपूर आखिर इस मंदिर में क्यों आए, जबकि शहर साईं बाबा के काफी मंदिर हैं। वजह है, इस मंदिर और युवराज का पुराना नाता। अमेरिका में कीमोथैरेपी करवा रहे युवी के लिए वीरवार को कपूर अरदास करवा रहे थे।
इस मंदिर में युवराज और उनकी मां शबनम अक्सर आते हैं। साईं बाबा की जो मूर्ति इस मंदिर में लगी है उसकी स्थापना भी युवराज सिंह के हाथों हुई है। 2007 में युवराज और शबनम ने जयपुर से साईं बाबा की मूर्ति मंगाई थी।
दरअसल शबनम सिंह करीब 7-8 सालों से मंदिर आ रही हैं। तब मंदिर का प्रागंण कच्च था और सुविधाएं भी नहीं थी। साईं बाबा में श्रद्धा के चलते उन्होंने यहां पर फर्श डलवाया और रसोई घर सहित अन्य सुविधाएं स्थापित की। युवराज और शबनम जब भी चंडीगढ़ में होते हैं, वीरवार को इस मंदिर में जरूर आते हैं।
वीरवार को चलता है लंगर
हर वीरवार को राजकुमार कपूर यहां आते हैं और शाम को लंगर का भोग लगवाया जाता है। कपूर लंगर में दिए जाने वाले पकौड़े लाते हैं, जिन्हें शाम को चाय के साथ बांटा जाता है। बकौल कपूर, आज युवी के लिए लोग देश भर में दुआएं कर रहे हैं। मैं तो युवी को बचपन से जानता हूं और जब वह वापस आएगा तो एक अलग ही युवी नजर आएगा।