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संयंत्र को ट्राफी मिली, कर्मियों को क्या
Matrix News
| Jun 27, 2012, 14:13PM IST
सिटी रिपोर्टर -!-भिलाई
देश के इस्पात उद्योग में अपनी धाक जमाते हुए भिलाई इस्पात संयंत्र अब तक दस बार प्रधानमंत्री ट्राफी जीत चुका है। इससे संयंत्र का गौरव बढ़ा है, लेकिन कर्मियों के मन में यह सवाल कौंधने लगा है कि आखिर उनको क्या मिला। प्रबंधन पहले कर्मियों को कुछ न कुछ भेंटकर देकर पीएम ट्राफी जीत की खुशी शेयर करते थे। पिछले पांच साल से यह परंपरा बंद कर दी गई है।
दो करोड़ रुपए नगद का यह पुरस्कार हर साल एकीकृत इस्पात संयंत्रों को निर्णायकों के एक समूह द्वारा आंकलन करने के बाद दिया जाता है। निष्पादन, उत्पादन, उत्पादकता, मुनाफा, गुणवत्ता, उत्पाद विकास, ग्राहक संतुष्टिकरण, कार्यसंस्कृति, मानव संसाधन विकास, निगमित सामाजिक जिम्मेदारी, नागरिक सुविधाएं जैसी विभिन्न कसौटियों पर कारखाने को परखा जाता है।
भिलाई इस्पात संयंत्र ने सबसे पहले 1992-93 और 1993-94 के लिए पहली बार लगातार दो वर्षों के लिए यह प्रतिष्ठित ट्राफी जीता। इसके बाद 1995-96, 1996-97 और 1997-98 लगातार तीन वर्षों तक ट्राफी जीतने की तिकड़ी बनाई। बाद में 2003-04 ओर 2004-05 के लिए फिर से ट्राफी पर कब्जा जमाया। 2006-07, 2007-08 और 2009-10 के लिए कुल दसवीं बार ट्राफी जीतकर सर्वश्रेष्ठ इस्पात संयंत्र होने का इतिहास फिर दोहराया।
पहले ट्राफी जीतने की खुशी में प्रबंधन कर्मियों को भी गिफ्ट देकर उनका हौसला अफजाई करते थे। या यूं कह लीजिए कि उनके श्रम, समर्पण और लगन का सम्मान करते थे। दो बार चांदी का सिक्का, एक बार सोने का सिक्का, पति-पत्नी दोनों के लिए ब्रांडेड कंपनी की हाथ घड़ी और एक साल विशेष क्वालिटी का फेमिली लंच बाक्स दिया था। जिनकी बदौलत बीएसपी देश का सर्वश्रेष्ठ इस्पात संयंत्र चुना जाता रहा है प्रबंधन अब उन्हें किनारे करने लगा है। पिछली पांच ट्राफी का कोई निशान कर्मियों को नहीं मिला। इस साल भी जब जनवरी के दूसरे सप्ताह में 2009-10 के लिए विजेता संयंत्र की घोषणा की गई तो बीएसपी के चमचमाते मुकुट में एक और ताज जड़ गया, लेकिन कर्मियों की उम्मीदें अब तक फीकी की फीकी है। सीईओ पंकज गौतम ने सिर्फ यह कहकर अपनी जिम्मेदारी निभा ली कि प्रधानमंत्री ट्राफी जीतना भिलाई की उत्कृष्ट कार्य संस्कृति, उसकी आंतरिक प्रक्रियाओं, प्रणालियों की दक्षता और प्रभावशाली होने तथा सभी विपरीत परिस्थितियों पर विजय पाने की सामूहिक दृढ़ता को प्रमाणित करती है। भिलाई स्टील मजदूर सभा एटक के विनोद कुमार सोनी, भिलाई श्रमिक सभा के एचएस मिश्रा, स्टील वर्कर्स यूनियन के दिलीप विश्वास, बृजबिहारी मिश्रा, एक्टू के बृजेंद्र तिवारी कहते हैं कि सम्मान पाने वाले संयंत्र प्रबंधन को अपने कर्मियों के भी सम्मान का ख्याल रखना चाहिए।






