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63 हजार राशन कार्डो के वारिस नहीं
अनिल कुर्रे
| Aug 22, 2012, 05:26AM IST

इसके बाद भी कोई लेने नहीं पहुंच रहे हैं। खाद्य विभाग का कहना है कि अधिकांश राशन कार्डो में नाम गलत छपने के कारण कार्डधारी कार्ड लेने नहीं आ रहे हैं। वहीं, नगर निगम का कहना है कि लोगों में जागरूकता नहीं होने की वजह से कार्ड का वितरण नहीं हो पा रहा है।
राशन की अफरा-तफरी रोकने के लिए मैनुअल राशन कार्ड के स्थान पर अब कंप्यूटराइज्ड कार्ड बनाए जा रहे हैं। शासन का आदेश मिलने के बाद पिछले साल नवंबर-दिसंबर माह में नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत ८४ हजार मैनुअल राशन कार्डो को निरस्त कर इसके स्थान पर नए कंप्यूटराइज्ड कार्ड बनाए गए हैं। नगर निगम ने कार्डधारियों से पुराने कार्ड जमा कराने के बाद नए कार्ड बनाने के लिए सूची खाद्य विभाग को सौंपी थी।
खाद्य विभाग ने नगर निगम की ओर से दी गई सूची के आधार पर एपीएल योजना में राशन कार्ड बनाया है। कार्ड बनने के बाद वार्डो में कैंप लगाकर इसका वितरण किया जाना था। डीबी स्टार को मिली जानकारी के अनुसार ८४ हजार राशन कार्डो में से अब तक सिर्फ २१ हजार काडरें का वितरण हुआ है। जबकि ६३ हजार कार्डधारियों का कहीं अता-पता नहीं है।
नगर निगम की ओर से कई बार वार्डो में मुनादी कराकर कैंप भी लगाए गए थे। इसके बाद भी कोई कार्डधारी इसे लेने नहीं आ रहे हैं। खाद्य विभाग का कहना है कि अधिकांश राशन कार्डो में कार्डधारियों के नाम की छपाई गलत तरीके से हुई है। इसकी एक वजह यह भी हो सकती है। उनका कहना है कि नगर निगम ने ही कार्डधारियों के नाम खाद्य विभाग को उपलब्ध कराए गए थे।
मामले में विभाग की कहीं भी गलती नहीं है। दूसरी ओर नगर निगम का कहना है कि लोगों में जागरूकता नहीं होने की वजह से कोई कार्डधारी राशन कार्ड लेने नहीं आ रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का ट्रांसफर हो गया है। इस वजह से भी लोग नहीं आ रहे हैं। तीसरी वजह यह भी बताई जा रही है कि अधिकांश पुराने राशन कार्ड फर्जी थे। कंप्यूटराइज्ड होने की वजह से कार्डो का वितरण नहीं हो रहा है।
नगर निगम का कहना है कि शेष बचे ६३ हजार कार्डो को बांटने के लिए एक बार फिर से वार्डो में कैंप लगाए जाएंगे। इसके बाद भी कोई कार्डधारी नहीं आते हैं, तो इसे निरस्त कर दिया जाएगा। उनका कहना है कि आने वाले समय में जोनवार शिविर लगाने की अनुमति निगम आयुक्त से की गई है। डेट फाइनल होने के बाद इसकी शुरुआत की जाएगी।
कार्ड फर्जी होने का अंदेशा
भारी संख्या में राशन कार्ड नहीं बंटने से सरकारी महकमों में तरह-तरह की बातें हो रही है। कुछ लोगों का कहना है कि बड़ी संख्या में कार्डो का वितरण नहीं होना अचरज की बात है। अधिकांश कार्ड फर्जी होने की स्थिति में कार्डधारी नहीं मिल रहे हैं। क्योंकि इस बार एपीएल योजना में कंप्यूटराइज्ड कार्ड बनाए गए हैं। इसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर आसानी से पता लगाया जा सकता है।
ऑनलाइन होने की वजह से एक क्लिक करते ही सारी जानकारियां आम लोगों को मिल जाएगी। मालूम हो कि १९९२ में ये सभी राशन कार्ड बनाए गए थे। उस समय आसानी से कार्ड बन जते थे। कार्डो का नवीनीकरण नहीं होने से यही कार्ड अरसे से चले आ रहे थे। नवीनीकरण नहीं होना भी एक वजह है। क्योंकि इस दौरान अधिकांश लोग बाहर जा चुके हैं। ऐसे लोगों के नाम अभी भी राशन कार्डो में चले आ रहे हैं और उनके नाम से आवंटन हो रहा है।
सालों से मिल रहा था केरोसिन
शहरी क्षेत्र में एपीएल योजना के तहत १९९२ में राशन कार्ड बनाए गए थे। उस समय कार्डधारियों को केवल केरोसिन दिया जाता था। केरोसिन का आवंटन कार्ड के आधार पर होता था, लेकिन कंप्यूटराइज्ड होने के कारण ६३ हजार कार्डो का वितरण नहीं होने से अनुमान लगाया जा रहा है कि खाद्य विभाग की ओर से सालों से किस आधार पर और किसे केरोसिन का आवंटन किया गया। नगर निगम ने भी माना है कि अधिकांश लोगों का ट्रांसफर हो चुका है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिरकार इतने सालों के केरोसिन गए कहां? मालूम हो कि पिछले साल से ही एपीएल योजना में राशन व गेहूं मिलना शुरू हुआ था। उस समय चावल व गेहूं के रेट अधिक थे। इस साल से इसे घटाकर साढ़े ९ रुपए चावल और साढ़े ७ रुपए में गेहूं दिए जा रहे हैं। सस्ते में अनाज लेने के कारण अधिकांश लोग अब राशन कार्ड बनवा रहे हैं।
मुनादी होगी, फिर से वार्डो में लगाए जाएंगे कैंप
आधे से अधिक राशन कार्डो का वितरण नहीं होने से नगर निगम के अलावा खाद्य विभाग के अधिकारी भी सकते में हैं। निगम अधिकारियों का कहना है कि एक बार फिर से कैंप लगाकर शेष बचे राशन कार्डो का वितरण किया जाएगा। उनका कहना है कि नगर निगम आयुक्त अवनीश शरण से कैंप लगाने की मंजूरी मिल गई है।
शहर में जोनवार कैंप लगाए जाएंगे और मुनादी कराने के बाद वितरण किया जाएगा। हालांकि अभी तक डेट फाइनल नहीं हुआ है। जल्द ही कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने के बाद वितरण शुरू किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि कैंप के बाद भी अगर हितग्राही नहीं मिलते हैं, तो कार्डो को निरस्त कर दिया जाएगा।
सीधी बात
जोनवार कैंप लगाए जाएंगे
अनिल सिंह, खाद्य शाखा प्रभारी नगर निगम
क्या वजह है कि ५ महीने तक लगातार कैंप लगाने के बाद भी अब तक एपीएल योजना के तहत कंप्यूटराइज्ड बने राशन कार्डो का वितरण नहीं हो सका है? लोगों में जागरूकता नहीं होने की वजह से अब तक राशन कार्डो का वितरण नहीं हो सका है। साथ ही कुछ कार्डधारी ट्रांसफर होकर चले गए है। इस वजह से भी लोग नहीं पहुंच रहे हैं।
? कुछ लोगों का कहना है कि इनमे से अधिकांश कार्ड
फर्जी हैं।
- इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
? शेष बचे राशन कार्डो को बांटने निगम की ओर से क्या प्रयास किए जा रहे हैं?
- जोनवार कैंप लगाए जाएंगे। इसकी अनुमति आयुक्त ने दी है। डेट फाइनल होने के बाद इसकी शुरुआत की जाएगी।
सीधी बात
कार्डधारियों के नाम गलत
नितीश त्रिवेदी, सहायक खाद्य अधिकारी
? विभाग की ओर से एपीएल योजना के तहत बनाए गए अधिकांश राशन कार्डो में कार्डधारियों के नाम गलत छपने की शिकायम मिली है।
- कार्डधारियों की सूची नगर निगम की ओर से खाद्य विभाग को उपलब्ध कराई गई थी। सूची के अनुसार ही कार्ड बनाए गए हैं।
? करीब 63 हजार कार्डधारी नहीं मिल रहे हैं।
- हां, जानकारी मिली है। नगर निगम कैंप लगाकर कार्डो का वितरण करेंगे।
? अभी आवंटन किस आधार पर किया जा रहा है।
- जितने कार्डो का वितरण हो चुका है, उसी आधार पर वितरण किया जा रहा है।
अब तक कई कार्ड हो चुके हैं निरस्त
बीपीएल और एपीएल योजना में बांटे गए कई हजार राशन कार्ड निरस्त हो चुके हैं। इसके पहले बीपीएल राशन कार्ड सत्यापन किया गया था। एक रुपए किलो में चावल मिलने के कारण अपात्र लोगों के नाम पर भी कार्ड जारी कर दिए गए थे। काडरें के सत्यापन में खुलासा होने के बाद फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था।






