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मंच पर भिड़ गए हरिप्रसाद और जोगी

भास्कर न्यूज | Oct 30, 2012, 07:24AM IST
 
 


बिलासपुर.  बिलासपुर जिले के बिल्हा में कार्यकर्ताओं को गुटबाजी न करने की नसीहत दे रहे कांग्रेस के दो दिग्गज नेता मंच पर ही भिड़ गए। कांग्रेस महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने जोगी जिंदाबाद के नारे लगा रहे कार्यकर्ताओं को चापलूसी बंद करने की नसीहत दे दी, जिससे बवाल मच गया।


 


इससे पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी नाराज हो गए और उन्होंने सीधे सीधे हरिप्रसाद को अपना भाषण देने को कहा। यह सलाह भी दी कि सम्मेलन में किसी का नाम लेकर भाषण न दिया जाए। हरिप्रसाद भाषण बंद कर जाने लगे, लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल ने उन्हें रोका। मिशन 2013-14 के तहत कांग्रेस विधानसभा क्षेत्रों में मंथन शिविर का आयोजन कर रही है।


इसी कड़ी में सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक के विधानसभा क्षेत्र बिल्हा में शिविर का आयोजन किया गया। इसमें कांग्रेस की गुटबाजी सतह पर आ गई। जोगी अपने समर्थकों के साथ पहुंच गए। नारे लगा रहे समर्थकों से हरिप्रसाद ने कहा कि जोगी को पहचान की जरूरत नहीं है। उन्होंने चापलूसी बंद करने को कहा।


इससे जोगी ने उनका और उनके बेटे अमित जोगी का नाम लेने पर विरोध करते हुए कहा कि जोगी की बात करने के लिए यह सम्मेलन नहीं बुलाया गया है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि अब किसी का नाम लेकर कोई नहीं बोलेगा। इसके बाद हरिप्रसाद ने अपना भाषण बंद कर दिया और मंच से जाने लगे, लेकिन नंद कुमार पटेल ने किसी तरह उन्हें रोक लिया। 


जोगी द्वारा भाषण के बीच में इस प्रकार जोरदार विरोध जताने के बाद हरिप्रसाद काफी देर तक असहज व निराश नजर आए और मोबाइल पर बातें करते रहे। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने पीसीसी के कार्यक्रम के दौरान हुई घटना की जानकारी एआईसीसी को दे दी है।  


कब शुरू हुआ विवाद


दोपहर करीब 3.12 बजे एआईसीसी की सचिव आयशा सिद्दीकी यूपीए सरकार की वित्तीय सहायता से रमन सरकार द्वारा अपने नाम से चलाई जा रही योजनाओं पर बोल रही थीं। इसी बीच अजीत जोगी अपने बेटे अमित जोगी व समर्थकों के साथ सम्मेलन स्थल पर पहुंचे।


कार्यकर्ताओं ने मंच के सामने और बाईं ओर कब्जा जमा लिया। करीब 10 मिनट बाद माहौल शांत हुआ तो पीसीसी महासचिव डॉ. शिव डहरिया ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इसके बाद करीब 3.25 बजे बीके हरिप्रसाद ने माइक संभाला। उन्हें एफडीआई के बारे में कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शन के लिए मंच पर बुलाया गया।  



हरिप्रसाद के नसीहत देते ही बरपा हंगामा 


मंच के सामने जोगी समर्थकों द्वारा नारेबाजी करने से हरिप्रसाद नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि बलौदा बाजार में भी ऐसा किया गया था। जोगी समर्थकों से हरिप्रसाद ने कहा कि अगर वे जोगी के हितैषी हैं और उनका भविष्य अच्छा बनाना चाहते हैं तो अनुशासन में रहें। जोगी नए नहीं हैं। वे उनके साथ 25 साल पहले पार्लियामेंट में जाते थे। जोगी को किसी की पहचान की जरूरत नहीं है। चापलूसी बंद कीजिए। उसके बाद जोगी समर्थकों ने नारे और तेज कर दिए। 
वे छात्र राजनीति से एनएसयूआई, युवक कांग्रेस से एआईसीसी तक पहुंचे हैं, ऊपर से नहीं टपके।  



भाषण के बीच ही भड़के अजीत जोगी 


करीब 3.29 बजे हरिप्रसाद का भाषण चल ही रहा था कि जोगी नाराज हो गए। जिला कांग्रेस अध्यक्ष अरुण तिवारी से माइक लेकर उन्होंने जोरदार विरोध जताया और तल्ख लहजे में हरिप्रसाद से कहा कि जोगी की बात करने के लिए यह सम्मेलन नहीं बुलाया गया है। हमारा नाम न लिया जाए। हम कांग्रेस के सम्मेलन में आए हैं। यहां कोई किसी का नाम लेकर नहीं बोलेगा। नेताओं के चेहरों पर तनाव व चिंता की लकीरें साफ नजर आने लगी। कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर का यह अंतिम सत्र था, इसलिए नेताओं के भाषणों तक करीब घंटेभर कार्यक्रम चला। 


 



कुछ नहीं, सब ठीक है



सम्मेलन में नारेबाजी नहीं की जानी चाहिए। मैंने नारे लगा रहे कार्यकर्ताओं को शांत कराया। आगे अब कुछ नहीं है। मामला खत्म हो गया है। बीके हरिप्रसाद,प्रदेश प्रभारी


कुछ नहीं हुआ हमारे बीच


हरिप्रसाद और मैं 25 साल से मित्र हैं। हम दोनों साथ में काम कर रहे हैं। हमारे बीच ऐसा कुछ नहीं हुआ। आयोजन सफल रहा।



अजीत जोगी, पूर्व मुख्यमंत्री

 
 
 

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