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बसें सड़कों पर, ट्रैफिक का बुरा हाल
Bhaskar news | Aug 05, 2012, 05:27AM IST

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद यातायात विभाग ने दावा किया था कि ट्रैफिक की अव्यवस्था दूर कर ली गई है, लेकिन जमीनी हकीकत से शहर के लोग हर रोज दो-चार हो रहे हैं। अंडरग्राउंड सीवरेज के कारण खस्ताहाल सड़कों के अलावा बेतरतीब यातायात से हर कोई परेशान है। इस परेशानी को बस संचालक और बढ़ा रहे हैं। शहर की तकरीबन सभी प्रमुख सड़कें बस अड्डे सा नजारा दिखाई देता है। हैवी ट्रैफिक वाले इलाकों का और भी बुरा हाल है। वैसे तो ट्रैफिक का दबाव करने के लिए बस स्टैंड को शहर से बाहर परसदा शिफ्ट कर दिया गया है, फिर भी बसों का जमावड़ा शहर के भीतर ही होता है। मामा-भांचा तालाब के सामने सड़क किनारे आधा दर्जन बसों का खड़ा रहना आम बात है।
थियेटर की भीड़, उस पर सड़क पर बसों का कब्जा जाम का कारण बनता है। यहां से शो छूटने के समय यहां से गुजरने वाला हरेक राहगीर जाम से बेहाल रहता है। इसके ठीक आगे रविंद्रनाथ टैगोर चौक से बस स्टैंड चौक के बीच दर्जनभर बसें खड़ी रहती हैं। इस सड़क की चौड़ाई पर्याप्त है, लेकिन बसों के अवैध कब्जे से चौड़ाई आधी रह जाती है। बची हुई सड़क जर्जर है, जिस पर सैकड़ों वाहनों को गुजरना पड़ता है। बस स्टैंड से जिला अस्पताल की ओर जाएं तो भी यही नजारा देखने को मिलता है।
बस स्टैंड से सीएमडी चौक तक बसें खड़ी रहती हैं। बस स्टैंड से अग्रसेन चौक पर भी सीवरेज के लिए खुदाई हुई है, जिसके चलते यह सड़क वन-वे हो गई है। ऐसे में इमलीपारा की सड़क आम लोगों के लिए विकल्प साबित होता है। इस मार्ग पर भी बसों का जमावड़ा रहता है। इमलीपारा मार्ग के मुहाने की सड़क सकरी है और यहां पर ही बसें खड़ी कर दी जाती हैं। इससे चार पहिया वाहनों का मार्ग पर जाना भी मुश्किल रहता है। कुल मिलाकर पुराने बस स्टैंड के आसपास ट्रैफिक का जितना ज्यादा दबाव होता है, बस संचालक उतनी ही लापरवाही बरतते हैं।
पाबंदी के बाद भी आवाजाही
बसों को नए बस स्टैंड में शिफ्ट करने के बाद शिवरीनारायण रोड पर चलने वाली बसों का पुराने हाईकोर्ट मार्ग से आवाजाही प्रतिबंधित है। इसके बाद भी बसें इसी मार्ग पर चल रही हैं। यातायात विभाग ने इस मार्ग की बसों को नेहरू चौक से मोपका होते हुए आगे बढ़ने की व्यवस्था दी है, लेकिन इस पर अमल ही नहीं किया जा सका।
बसों पर रहम, बाइक-कार वालों पर सितम
इन दिनों यातायात विभाग उन वाहनों पर कार्रवाई कर रहा है, जो सड़क किनारे खड़े रहते हैं और जिनके चलते जाम की स्थिति निर्मित होती है। विभाग का अमला कार, आटो, रिक्शा से लेकर दोपहिया सवारों पर ही अवैध पार्किग के लिए जुर्माना करता है, जबकि बसों पर किसी की नजर ही नहीं पड़ती। यूं कहें कि यातायात पुलिस जाम के लिए जिम्मेदार बस संचालकों पर कार्रवाई ही नहीं करना चाहती। यही वजह है कि बसों को सड़क पर खड़ा करने में संचालकों को किसी तरह की कार्रवाई का भय नहीं रहता।
सत्यम चौक पर ट्रैफिक थाने के सामने खड़े मवेशी मानो पुलिसवालों को मुंह चिढ़ा रहे थे। इनसे रह-रहकर ट्रैफिक प्रभावित होता रहा और अमला कार्रवाई में जुटा रहा।
इन मार्गो की लक्ष्मणरेखा बेअसर
: मंगला चौक से मंगला बस्ती के अंदर आने-जाने पर प्रतिबंध, समय सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे और शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक पाबंदी
: राजकिशोर नगर स्टेट बैंक तिराहा से शनि मंदिर तिराहा तक सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक
: व्यापार विहार मार्ग से गायत्री मंदिर, विद्यानगर, सीएमडी चौक तक पूर्ण प्रतिबंध
: टैगोर चौक से मन्नू चौक, जगमल चौक मार्ग पर पूर्णत: प्रतिबंध
: व्यापार विहार से विनोबा नगर तक की सड़क पर पूर्ण प्रतिबंध
ये कैसे ‘नो व्हीकल जोन’
शहर के व्यस्ततम मार्गो व चौराहों को ट्रैफिक पुलिस ने नो व्हीकल जोन में शामिल तो कर लिया, लेकिन इस पर अमल करने की दिशा में ठोस प्रयास नहीं किए जाते। ट्रैफिक पुलिस की लिस्ट के मुताबिक शहर में मानसरोवर चौक, देवकीनंदन चौक, नेहरू चौक, महामाया चौक, सीपत चौक, नेहरू बाल उद्यान तिराहा, राजेंद्र नगर चौक, डीआईजी तिराहा, सिविल लाइन तिराहा, सत्यम चौक, अग्रसेन चौक, श्यामा मुखर्जी चौक, टैगोर चौक, गांधी चौक, जगमल चौक, गुरुनानक चौक, तारबाहर चौक, इंदिरा गांधी चौक, सीएमडी चौक, डाकघर चौक, वैशाली नगर चौक, मगरपारा चौक, इंदु चौक, जरहाभाठा मंदिर चौक, शेफर स्कूल तिराहा, मुंगेली नाका चौक, म्ांगला चौक, राजीव गांधी चौक, महाराणा प्रताप चौक ‘नो व्हीकल जोन’ में शामिल हैं। इन स्थानों पर बेतरतीब पार्किग आसानी से देखी जा सकती है।






