झोला छाप डॉक्टर बना जच्चा-बच्चा की मौत का कारण
Source: dainik bhaskar news | Last Updated 07:35(07/02/12)
देवभोग. ग्राम घुमरापदर में समय पर उपचार नहीं मिलने से प्रसूता और उसके बच्चें की मौत हो गई। स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में झोला छाप डाक्टर ने प्रसव कराने की कोशिश की जिसमें बच्चे की जान चली गई। बच्चे की घर में मौत के बाद और प्रसव के बाद स्थिति गंभीर होने पर अस्पताल ले जाने के दौरान प्रसूता की रास्ते में ही मौत हो गई।
ग्राम की मुगैया बाई पति डोमार को पहली बार गर्भ ठहरा था। प्रसव पीड़ा शुरू होने पर ग्राम के उपस्वास्थ्य केंद्र में उन्हें कोई स्वास्थ्य कर्मी नहीं मिला। घर में किसी अन्य झोलाछाप डाक्टर ने प्रसव कराया जिससे बच्चें की प्रसव के दौरान मौत हो गई। उसके बाद मुगैंया की स्थिति गंभीर हो गई। तुरंत स्थानीय मितानिन मथा बाई महांति ने तुरंत 108 संजीवनी एक्सप्रेस को काल किया।
उसमें मुंगैया बाई को डाल कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र देवभोग भेज दिया गया जहां लगभग चार बजे उसे डॉ. अंजू सोनवानी से मृत घोषित कर दिया। उन्होंने बताया कि जच्चा की मौत रास्ते में हो चुकी थी। उल्लेखनीय है कि घुमरापदर से मैनपुर 40 किलो मीटर तथा देवभोग 25 किलो मीटर दूर है। ग्राम घुमरापदर धूर आदिवासी ग्राम है।
मृतका के परिजनों ने बताया कि यहां के उप स्वास्थ्य केंद्र में माह भर में स्वास्थ्य कर्मी कभी-कभार मौजूद रहती है। उसके नहीं रहने के कारण मुगैया का जच्चा-बच्चा कार्ड नहीं बन पाया, जिससे उसे समय-समय पर मिलने वाली आवश्यक दवाएं नहीं मिल सकी।
उल्लेखनीय होगा कि गांव में गर्भवती महिलाओं की जानकारी एकत्र करना, उसे समय -समय पर टीटीएस के इंजेक्शन लगाना, आयरन के कैप्सूल देना, ब्लड प्रेशर की जांच की जिम्मेदारी स्वास्थ्य कर्मी की है। डा. अंजू सोनवानी ने बताया कि घर में किसी झोला छाप डाक्टर से डिलीवरी कराने से दुखद मौतें हुई। बच्चे की मौत डिलीवरी के दौरान उसे लापरवाही से खींचने तथा मुगैंया की मौत डिलीवरी के दौरान गर्भाशय से छेड़छाड़ के कारण हुई।