बात बनी तो और बढ़ेगी रेल लाइन
Source: dainik bhaskar news | Last Updated 08:12(08/02/12)
बिलासपुर. राज्य सरकार और रेल मंत्रालय के बीच होने वाली बैठक में सार्थक पहल हुई तो प्रदेश में रेल लाइन का बड़ा नेटवर्क तैयार होगा। रेलवे ने प्रदेश से शुरू होने वाली 7 नई रेल लाइनों का सर्वे पूरा कर लिया है। इनमें 5 रेल लाइनें फायदेमंद हैं, जिन्हें मंजूरी देने में रेलवे को परेशानी नहीं है। अब जरूरत है तो सिर्फ राज्य सरकार की ओर से सार्थक पहल की।
रायपुर-झारसुगड़ा, झारसुगड़ा-दुर्ग, डोंगरगढ़-कोटा, गेवरारोड-पेंड्रा, रायगढ़-मांड सहित प्रदेश से शुरू होने वाली 7 नई रेल लाइनें ऐसी हैं, जिसका प्रस्ताव दशकों से लंबित है। इन लाइनों के अस्तित्व में आने की उम्मीद जगी है। दरअसल रेल मंत्रालय ने इस बजट में प्रदेश की नई रेल लाइनों का सर्वे अपडेट कराने की घोषणा की थी। इस हिसाब से सर्वे का काम लगभग पूरा हो गया है और सर्वे रिपोर्ट में 5 रेल लाइनें रेलवे के नजरिए से भी फायदेमंद हैं।
प्रदेश के सांसदों ने रेल बजट के पहले इन्हीं प्रस्तावित रेल लाइनों को स्वीकृति देने की अनुशंसा रेल मंत्रालय से की है। बुधवार को होने वाली बैठक में प्रदेश के सांसद नई रेल लाइनों का मुद्दा उठाएंगे, लिहाजा रेलवे ने भी अपनी तैयारी कर ली है। बताया गया है कि बैठक में रेलमंत्री नई रेल लाइनों की जानकारी मुख्यमंत्री रमन सिंह सहित मौजूद सांसदों को देंगे। रेल मंत्रालय बताएगा कि 5 लाइनें फायदेमंद हैं, जिन्हें स्वीकृति दी जा सकती है, बशर्ते राज्य सरकार भू-अधिग्रहण और रास्ते में आने वाले जंगल के कटाई की अनुमति देने पर सहमत हो। एक तरह से नई लाइनों के मामले में गेंद राज्य सरकार के पाले में है।
रेलवे का फायदा
नई लाइनों की स्वीकृति के पीछे रेलवे का बड़ा हित छिपा है। गेवरारोड-पेंड्रा, रायपुर-झारसुगड़ा, रायगढ़-मांड ऐसी रेल लाइनें हैं, जिसके निर्माण से रेलवे के लदान की क्षमता दोगुनी हो जाएगी। दरअसल रेल प्रशासन प्रदेश की खदानों तक पहुंच बनाने के साथ ही खनिज संपदा की अधिक से अधिक ढुलाई के लिए आधारभूत संरचना तैयार करने में जुटा है।