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नियम विरुद्ध डायवर्सन में 1.78 करोड़ का नुकसान

संजीव पाण्डेय | Sep 03, 2012, 06:40AM IST
बिलासपुर. सरकारी मशीनरी ने नियम विरुद्ध डायवर्सन कर सरकार की ही जेब काट दी। जांजगीर जिले के राजस्व अफसरों ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से अभिमत लिए बगैर ही 51.76 एकड़ जमीन का डायवर्सन कर दिया। हद तो यह है कि जमीन मास्टर प्लान में शामिल है, फिर भी नियमों की अनदेखी की गई। इससे शासन को 1.78 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ और बतौर ईडब्ल्यूएस गरीबों के लिए सुरक्षित रखी गई 8 एकड़ जमीन ऊंचे दामों में बिक गई।



जांजगीर जिले के राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार का ये खुलासा सूचना के अधिकार के दस्तावेजों से हुआ है। दैनिक भास्कर को हासिल दस्तावेजों से खुलासा होता है कि जुलाई 2008 से अगस्त 2012 के बीच जमीन परिवर्तन के 180 प्रकरण ऐसे हैं, जिसमें डायवर्सन के पहले टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से अभिमत नहीं लिया गया, जबकि परिवर्तित जमीन मास्टर प्लान में शामिल नगर और ग्राम की हैं। सभी मामलों में जमीन का रकबा 10 डिसमिल से अधिक और ढाई एकड़ से कम है। जांजगीर जिले में वर्ष 2006 में मास्टर प्लान लागू हुआ।




इसमें नैला, जांजगीर सहित आसपास के 11 गांवों को शामिल किया गया। शासन के हिसाब से इन गांवों का विकास टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टी एंड सीपी) की गाइड लाइन से होना है, जिसके कारण 10 डिसमिल या इससे ज्यादा जमीन का मद परिवर्तन और विकास टी एंड सीपी की गाइड लाइन के मुताबिक ही होना है। सरकारी महकमे ने शासन के नियम को ताक पर रखकर जमीन का मद परिवर्तन और विकास करा दिया। इसका खामियाजा न सिर्फ अव्यवस्थित बसाहट, बल्कि राजस्व हानि के रूप में सामने आया है।


मास्टर प्लान में शामिल क्षेत्र

नैला, जांजगीर, सरखों, खोकसा, सुकली, सिवनी, कन्हाईबंद, बनारी, पुटपुरा, नवापारा, जर्वे, कुलीपोटा एवं खैरा।


इनके कार्यकाल में हुई गड़बड़ी
आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक तमाम गड़बडियां तीन अफसरों के कार्यकाल में हुई हैं। इनमें तात्कालीन एसडीएम एससी श्रीवास्तव, एमएल सिदार और एसके तिवारी का नाम शामिल है। एमएल सिदार जांजगीर में दो बार पदस्थ रह चुके हैं, जबकि एसके तिवारी वर्तमान में दूसरी बार एसडीएम का प्रभार संभाल रहे हैं। इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि गड़बड़ी आरआई लेवल पर ही होती है, लेकिन अंतिम आदेश एसडीएम ही जारी करता है।


ऐसे हुआ सरकार को नुकसान

मास्टर प्लान में शामिल गांव एवं नगर की जमीन का डायवर्सन तभी होगा, जब टी एंड सीपी ले आउट पास करेगा। इसके लिए भू-स्वामी को इस विभाग के दिशा-निर्देशों को पालन करते हुए शुल्क भी देना होगा। शासन के खाते में बतौर शुल्क प्रति वर्गमीटर 10 रुपए और प्रति एकड़ 3.44 लाख रुपए जमा होगा। इसके अलावा जमीन का 15 फीसदी हिस्सा ईडब्ल्यूएस के लिए और 10 फीसदी जमीन गार्डन के लिए छोड़ना होगा।

सरकारी दस्तावेजों से पता चलता है कि लगभग 52 एकड़ जमीन का मद परिवर्तन नियम विपरीत हुआ है। इससे सरकारी खजाने में बतौर शुल्क 1.78 करोड़ रुपए जमा होते। यह आंकड़ा मास्टर प्लान में शामिल क्षेत्र का है। जांजगीर तहसील या जिलेभर में हुए मद परिवर्तन को खंगाला जाए तो शासन को हुए नुकसान का आंकड़ा 10 करोड़ रुपए के पार होगा।


इस तरह हुआ खुलासा

बिलासपुर जिले में डायवर्सन घोटाले को अंजाम देने वाले अफसर जांजगीर जिले में पदस्थ हैं, लिहाजा गड़बड़ी की आशंका पहले से थी। सूचना के अधिकार से बिलासपुर की गड़बड़ी सामने लाने वाले रजनीश साहू ने ही जांजगीर जिले के बारे में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से जानकारी मांगी। दस्तावेजों से पता चला कि टी एंड सीपी ने वर्ष 2008 से 2012 तक कुल 139 ले आउट पास किए हैं। इसके बाद तहसील से डायवर्सन के प्रकरण निकलवाए गए। 180 प्रकरण ऐसे मिले जो टी एंड सीपी तक पहुंचे ही नहीं और डायवर्सन हो गया।
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