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चूल्हा-चौके के बाद लाठियां थाम लेती हैं मन्नाडोल की महिलाएं

संजीव पाण्डेय | Nov 19, 2012, 03:44AM IST
चूल्हा-चौके के बाद लाठियां थाम लेती हैं मन्नाडोल की महिलाएं
बिलासपुर .  रात के 8 बजे थे, महिलाएं चूल्हा-चौका और घर का काम निपटाकर लाठी व टार्च लेकर बाहर निकल रहीं थीं।
 
चौपाल पर एक-एक कर 50 से 60 महिलाएं जमा हो गईं। दर्जनभर पुरुष भी उनके साथ हो लिए और निकल गए मोहल्ले के दौरे पर। कोई जुआ खेलते मिले या फिर नशे में धुत, पिटाई होनी तय है। दरअसल, तिफरा नगर पंचायत के मन्नाडोल में महिलाओं की यह रैली नशेड़ियों को सबक सिखाने की मुहिम है, जिससे आपराधिक घटनाओं को रोका जा सके। महिलाएं कहती भी हैं कि मोहल्ले को नशामुक्त करने के लिए अब प्रशासन की जरूरत नहीं है, वे खुद इसके लिए सक्षम हैं। 
 
मन्नाडोल शहर से लगी नगर पंचायत तिफरा का हिस्सा तो है, लेकिन यहां का परिवेश गांवों सा ही है। मोहल्ले में अवैध शराब की बिक्री, नशे के कारण अपराध और जुए से मोहल्ला बदनाम सा हो चला है। हाल ही में 14 नवंबर की रात मोहल्ले में किराना दुकान चलाने वाले कीर्तन खांडेकर की हत्या कर दी गई। हत्या मोहल्ले के युवक अजय गोंड़ ने की थी।
 
कारण था कि वह नशे में धुत था और व्यापारी ने आधी रात को उधार में सिगरेट देने से मना कर दिया। इस घटना ने ग्रामीणों के साथ-साथ यहां की महिलाओं को भीतर से झकझोर दिया। मिलनसार व्यापारी की मौत से पूरा गांव नशे के खिलाफ लामबंद हो चुका है। ग्रामीणों ने शराब की अवैध बिक्री और जुआरियों की धरपकड़ के लिए क्षेत्रीय विधायक का दरवाजा खटखटाया।
 
सैकड़ों महिलाओं ने उनके निवास का घेराव किया। इसके दूसरे दिन मन्नाडोल की महिलाओं ने कसम खाई कि वे अपने दम पर अपराध कम करेंगे। इसके लिए शनिवार की रात से अभियान शुरू किया गया। महिलाएं रात 8 बजे से रात 12 बजे तक मोहल्ले की रखवाली करती हैं।  
 
इस समय कोई जुआ खेलते या फिर नशे में मिला तो उसकी खैर नहीं। महिलाएं ऐसे लोगों को मौके पर ही सबक सिखा रही हैं। जहां कहीं भी शराबियों का झुंड दिखता है, वे पुलिसवालों की तरह टूट पड़ती हैं। महिलाओं का यह अभियान अब लगातार जारी रहेगा।
 
मन्नाडोल की 50 वर्षीय सोना साहू कहती हैं कि उन्होंने अपने घर में भी चेता दिया है कि शराब पीकर लौटे तो घर में घुसने नहीं दिया जाएगा। कौशिल्या, रूपा जैसी दर्जनों महिलाएं शराबियों के चलते बिगड़ी शांति व्यवस्था को लेकर चिंता जाहिर करती हैं। वे कहती हैं कि शराब की अवैध बिक्री को पुलिस का शह मिला है, नतीजतन प्रशासन से न्याय की उम्मीद बेमानी है। यही कारण है कि वे अपने दम पर मोहल्ले को सुरक्षित बनाने का प्रयास कर रहीं हैं। महिलाओं के इस प्रयास में मुन्नालाल साहू, सुरेश नेताम जैसे दर्जनों पुरुष भी मदद कर रहे हैं। 
 
जागरूक हो रहीं महिलाएं
 
शराब के चलते परिवार बंट रहे हैं और अशांति घर कर रही है। शराब के दुष्प्रभावों से महिला वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित रही है। देर से ही सही, लेकिन महिलाओं ने इतनी साहस जुटा ली है कि वे इस अपराध के खिलाफ आवाज बुलंद कर सकें।
 
बिल्हा ब्लाक के ग्राम सेंवार में इसका परिणाम भी सामने आया है, जहां महिलाओं के दम पर न सिर्फ शराब की बिक्री, बल्कि उसके सेवन पर भी रोक लग गया है। अब मन्नाडोल में आई जागृति इस ओर इशारा कर रही है आने वाले दिनों में शराबबंदी को लेकर गांव-गांव में इस तरह का अभियान शुरू होना चाहिए।
 
बेपरवाह है पुलिस, प्रशासनजुआ, सट्टा और शराब की अवैध बिक्री को लेकर तिफरा नगर पंचायत बदनाम हो चुका है। नगर के हरेक मोहल्ले में जुआ चल रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में शराब की बिक्री खुलेआम हो रही है। स्थानीय प्रशासन इन पर रोक लगाने के बजाय उन्हें सह दे रही है।
 
यही कारण है कि अपराध का ग्राफ भी बढ़ते जा रहा है। खासकर पुलिसवालों को इन सारी अवैध गतिविधियों की जानकारी होती है, लेकिन कभी, कोई कार्रवाई नहीं की जाती। कभी कार्रवाई होती भी है तो सांठगांठ के चलते उसे अंजाम तक नहीं पहुंचाया जाता। 
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